सन्त साहित्य की लौकिक पृष्ठभूमि | Sant Sahitya Ki Laukik Prashthbhumi

सन्त साहित्य की लौकिक पृष्ठभूमि | Sant Sahitya Ki Laukik Prashthbhumi
PDF डाउनलोड करने के लिए लिंक नीचे दिया गया है

सन्त साहित्य की लौकिक पृष्ठभूमि पुस्तक का कुछ अंश : श्रामारिणिक संस्करण बहुत कम उपलब्ध हैं । वैसे भी लोक में प्रचलित रहने तथा सम्म्प्रदायिक परम्पराओं द्वारा सुरक्षित रखे जांने के कारण सन्त-साहित्य के रूप को निश्चित कर पाना तथा उसका निश्चित रचना-काल निर्धारित कर पाना आसान नहीं है । इसके साथ ही, इस काव्य में लोक-जीवन से सम्बद्ध जो सामग्री-सन्दर्भ प्राप्त होते हैं, वे जीवन के इन पक्षों की रूपरेखा प्रस्तुत करने में तो सहायता करते हैं, पर इनके आधार पर पक्षों के ऐसे सूक्ष्म और विविध रूपों का विवेचन करना सम्भव नहीं हो सका है? जिससे इस लम्बे काल के विविध युगों की परिवर्तित मनोवृत्ति पर प्रकाश पड़ना सम्भव हो सका…………

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सन्त साहित्य की लौकिक पृष्ठभूमि | Sant Sahitya Ki Laukik Prashthbhumi
Author
CategoryHistorical Book in Hindi PDF History Book in Hindi Literature Book in Hindi
Language
Pages 398
Quality Good
Size 50 MB
Download Status Available
“आपको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई आपको सीखा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता। आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है।” ‐ स्वामी विवेकानंद
“You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.” ‐ Swami Vivekananda

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

Leave a Comment