सिनेमा-कल, आज, कल : विनोद भारद्वाज | Sinema-Kal, Aja, Kal : By Vinod Bharadwaj Hindi Book

सिनेमा-कल, आज, कल : विनोद भारद्वाज | Sinema-Kal, Aja, Kal : By Vinod Bharadwaj Hindi Book
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सिनेमा-कल, आज, कल पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : सुपरिचित फिल्म समीक्षक विनोद भारद्वाज तीन दशकों से भारतीय और विश्व सिनेमा के विशेषज्ञ के रूप में धर्मयुग, दिनमान, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, राष्ट्रीय सहारा, आउटलुक साप्ताहिक आदि देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते रहे हैं। ‘दिनमान’ के संपादक खुवीर सहाय के अनुरोध पर उन्होंने कॉलेज के दिनों में ही चुनी हुई विदेशी फिल्मों पर लिखना शुरू कर दिया था। याद में ‘धर्मयुग में धर्मवीर भारती के कहने पर उन्होंने हिंदी फिल्म समीक्षा का कालम लिखा ‘दिनमान’ के संपादकीय विभाग के एक सदस्य के रूप में विनोद भारद्वाज बे समय तक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पर लिखते रहे। नवभारत टाइम्स में कई साल तक उन्होंने फिल्म समीक्षा का कालन लिखा और इन दिनों वह ‘आउटलुक’ साप्ताहिक के फिल्म समीक्षक हैं। पिछले 32 सालों में विनोद भारद्वाज ने सिनेमा पर जो लिखा उसका एक प्रतिनिधि चयन इस पुस्तक में शामिल है। लेखक के पास विश्व सिनेमा को जानने जांचने के पर्याप्त औजार है और भारतीय सिनेमा की परंपरा से भी यह गहरे स्तर पर जुड़े हैं। मुंबइया लोकप्रिय सिनेमा पर भी उन्होंने एक अलग नजरिए से लिखा है।

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सिनेमा-कल, आज, कल | Sinema-Kal, Aja, Kal
Author
CategoryEntertainment Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi
Language
Pages 524
Quality Good
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“हमें न अतीत पर कुढ़ना चाहिए और न ही हमें भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए; विवेकी व्यक्ति केवल वर्तमान क्षण में ही जीते हैं।” ‐ चाणक्य
“We should not fret for what is past, nor should we be anxious about the future; men of discernment deal only with the present moment.” ‐ Chanakya

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