Mano Kal Hi Ki Baat Hai : By Ravindra Singh Hindi Book | मानो कल ही की बात है : रवीन्द्र सिंह द्वारा हिंदी पुस्तक

Mano Kal Hi Ki Baat Hai : By Ravindra Singh Hindi Book | मानो कल ही की बात है : रवीन्द्र सिंह द्वारा हिंदी पुस्तक
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मानो कल ही की बात है पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : 
इससे पहले कि आप मेरी इस कृति को पढ़ना शुरू करें और मैं आपको कहानी सुनाना शुरू करूं, मुझे आपका एक मिनट समय चाहिए और इसके लिए शुक्रिया कि आपने अपने मूल्यवान घंटे और दिन मेरे साथ बिताने के लिए चुने। इस व्यस्त दुनिया में, जहां सबके पास एक कहानी है, स्टेटस (फेसबुक का) या ट्विट है लोगों को यह बताने के लिए उनके मन में क्या चल रहा है, आप घंटों मेरी कहानी को पढ़ने के लिए चुन रहे हैं यह सराहनीय है। और अगर आप वह हैं जिन्होंने यह तय किया कि आप मेरा उपन्यास मांग कर नहीं, बल्कि खरीद कर पढ़ेंगे और अपने बुकशेल्फ में उसकी निजी प्रति रखेंगे तो आपको एक बार और शुक्रिया! आप वह पैसा मॉल में सिनेमा देखने में खर्च कर सकते थे या फ्रेंच फ्राई और कोला के साथ सैंडविच खाने में खर्च कर सकते थे, लेकिन आपने उस पैसे को खर्च किया मेरी पुस्तक को खरीदने में ताकि मैं लिखता रह सकूं जो मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैंने इस कहानी को अपने दिल के साथ जोड़ा है और यह उम्मीद करता हूं कि हर पन्ने पर मेरे अनुभवों में आप थोड़ा बहुत अपने आपको भी पाएंगे।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मानो कल ही की बात है | Mano Kal Hi Ki Baat Hai
Author
CategoryLiterature Book in Hindi Story Book PDF in Hindi
Language
Pages 156
Quality Good
Download Status Not for Download
“तुच्छ व्यक्तियों या क्षुद्र जिंदगियों जैसी कोई चीज़ जिस तरह से नहीं होती, ठीक वैसे ही तुच्छ काम जैसी भी कोई चीज़ नहीं होती।” ‐ एलेना बोनर, एलोन टुगेदर
“Just as there are no little people or unimportant lives, there is no insignificant work.” ‐ Elena Boner, Alone Together

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