अन्तर की ओर : मुनि श्री मिश्रीमल जी ‘मधुकर’ द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Antar Ki Aor : by Muni Shri Mishrimal Ji ‘Madhukar’ Hindi PDF Book – Social (Samajik)

अन्तर की ओर : मुनि श्री मिश्रीमल जी 'मधुकर' द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Antar Ki Aor : by Muni Shri Mishrimal Ji 'Madhukar' Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name अन्तर की ओर / Antar Ki Aor
Author
Category,
Language
Pages 242
Quality Good
Size 9 MB
Download Status Available

अन्तर की ओर का संछिप्त विवरण : एक ही बाज़ार मे एक ही वस्तु का व्यापार करने वाले अनेक व्यापारियो को हम देखते हैं किन्तु हम पाते है कि उन्हे एक-सरीखा लाभ नही होता । किसी को लांखो की आमदनी होती है, कोई पेट ही भर पाते है और कोई-कोई तो अपनी लगाई हुईं पूजी को भी खो बैठते है । ऐसा क्यो होता है ? इसके अनेक कारण हो सकते है………

Antar Ki Aor PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Ek hi bazar me ek hi vastu ka vyapar karane vale anek vyapariyo ko ham dekhate hain kintu ham pate hai ki unhe ek-sarikha labh nahi hota . Kisi ko lankho ki Aamdani hoti hai, koi pet hi bhar pate hai aur koi-koi to apani lagayi huyin pooji ko bhi kho baithate hai . Aisa kyo hota hai ? Isake anek karan ho sakate hai………
Short Description of Antar Ki Aor PDF Book : We see many traders trading the same goods in the same market, but we find that they do not have the same benefits. Some have income of Lankho, some are able to fill their stomach and some even lose their capital. Why does this happen? There can be many reasons for this……
“नागरिकता के दैनिक व्यवहार के बिना लोकतंत्र का दैनिक निर्वाह हो ही नहीं सकता।” ‐ राल्फ़ नेडर
“There can be no daily democracy without daily citizenship.” ‐ Ralph Nader

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

Check Competition Books in Hindi & English - कम्पटीशन तैयारी से सम्बंधित किताबें यहाँ क्लिक करके देखें

Leave a Comment