द साइंस ऑफ़ गेटिंग रिच : वैलेस डी वैटल्स द्वारा हिंदी ऑडियोबुक | The Science Of Getting Rich : by Wallace D. Wattles Hindi Audiobook
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सपने को साकार करने के लिए जरूरी सभी विशेषताएँ आपके अंदर छिपी हुई हैं। चाहे आप अपने बारे में अच्छे विचार न भी रखते हों, आप पहले भारी विफलता का सामना कर चुके हों, आप सोचते हों मैं तो यह सभी कुछ पहले ही आजमा चुका हूँ, फिर भी आप में अनंत संभावनाएं हैं, जरूरत है तो बस इस पुस्तक में दिए गए संदेशों पर खुले मस्तिष्क से विशेष ध्यान देने की। एक कहावत है, “यदि आप तैयार हैं तो ईश्वर आपके लिए मार्ग स्वयं तैयार करेगा” जैसे कि आपकी तैयारी को अंजाम देने के लिए यह पुस्तक आज आपके हाथों तक पहुंच चुकी है। याद रखें आपकी और मेरी तरह दुनिया भर के हजारों-लाखों लोगों को इस विशेष पुस्तक की आवश्यकता है। किंतु सवाल यह उठता है कि क्या आप तैयार हैं। क्या आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए तैयार हैं , क्या आप अमीर बनने के लिए तैयार हैं ? यदि आप अभी भी वह सभी कुछ पाना चाहते हैं जो आप पाना चाहते थे तो यह पुस्तक आपके लिए है। यदि आप अपना जीवन बदलना चाहते हैं तो जरूरत है बस आपको अपनी सोच को बदल डालने की !
आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप इस बुक में बताए गए सिद्धांतों पर बिना सवाल किए भरोसा एवं अमल करेंगे, जैसे कि आज मारकोनी अथवा एडीसन के सिद्धांतों पर किया जाता है। मेरा दावा है कि जो स्त्री अथवा पुरुष इन नियमों का बेहिचक पालन करेगा, थोड़े ही समय में वह धनी हो जाएगा। क्योंकि ये नियम विज्ञान पर आधारित हैं, इसलिए आपका असफल होना पूर्णतः असंभव है।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| AudioBook Name | द साइंस ऑफ़ गेटिंग रिच / The Science Of Getting Rich |
| Author | Wallace D. Wattles |
| Category | Hindi Audiobooks Business Books in Hindi Motivational Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Duration | 3:01 hrs |
| Source | Youtube |
“जब मैं चौदह साल का लड़का था, तब मेरे पिता इतने अज्ञानी थे कि मुझे उनका आसपास होना बिल्कुल नहीं पसंद था। लेकिन जब मैं इक्कीस का हुआ, तो मुझे बेहद आश्चर्य हुआ कि सात वर्षों में उन्होंने कितना कुछ सीख डाला था।” मार्क ट्वैन
“When I was a boy of fourteen, my father was so ignorant I could hardly stand to have the old man around. But when I got to be twenty-one, I was astonished at how much the old man had learned in seven years.” Mark Twain
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