रिच डैड पुअर डैड : रॉबर्ट टी. कियोसाकी द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Rich Dad Poor Dad : by Robert T. Kiyosaki Hindi Audiobook

रिच डैड पुअर डैड : रॉबर्ट टी. कियोसाकी द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Rich Dad Poor Dad : by Robert T. Kiyosaki Hindi Audiobook
पुस्तक का विवरण / Book Details
AudioBook Name रिच डैड पुअर डैड / Rich Dad Poor Dad
Author
Category,
Language
Duration 7:55 hrs
Source Youtube

Rich Dad Poor Dad Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : रॉबर्ट टी. कियोसाकी ने इस पुस्तक में माना है कि उनके दो पिता है। एक पिता बहुत ज्यादा अमीर थे तथा दूसरे पिता बहुत गरीब थे। दोनों पिताओं से मिले अनुभव को उन्होंने यहाँ बताया है। अब आप पूछेंगे दो पिता कैसे हो सकते हैं? तो जी हां, जो इनके असली पिता थे वह बहुत गरीब थे और बहुत पढ़े लिखे, उनके पास काफी डिग्रियां थी। परंतु वह जो उनके दूसरे पिता थे, वह अपने बेस्ट फ्रेंड के पिता को ही अपना पिता मानता था, जो बहुत ज्यादा अमीर हैं और अपने क्षेत्र में काफी सफल है। उनके दोनों पिता ने साथ ही में पढ़ाई की थी, उन्होंने कड़ी मेहनत परिश्रम भी किया। परंतु अमीर पिता ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी बल्कि जो गरीब पिता थे, उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। लेकिन अपने अपने क्षेत्र में दोनों ने काफी मेहनत करके अपनी सफलता प्राप्त की। लेकिन दोनों पिता के बीच में पैसा कमाने की राय बिल्कुल अलग थी।

रॉबर्ट टी. कियोसाकी के पहले गरीब पिता रॉबर्ट को समझाते थे कि कोई भी वस्तु या कोई भी ऐसी चीज नहीं खरीद सकता, उसके अंदर ऐसी काबिलियत नहीं है। परंतु दूसरे पिता उसी से कहते हैं यदि तुम कोई वस्तु नहीं खरीद सकते तो उसका कारण ढूंढो कि कैसे नहीं खरीद सकते? यदि तुम्हें वह प्राप्त करनी है तो उसे कैसे खरीद सकते हो? इन प्रश्नों को आप ढूढो। गरीब पिता की सोच नकारात्मक थी, वह रॉबर्ट द्वारा कही गई बात को यहीं पर खत्म कर देते थे। परंतु अमीर पिता द्वारा कही गई बात प्रश्नवाचक थी। हां यदि प्रश्नवाचक होता है तो हम अक्सर सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। हमें उसके कारण को ढूंढना होता है कि हम कैसे किसी वस्तु को खरीद सकते हैं, उसे प्राप्त कर सकते हैं।

यदि कोई यक्ति ऐसा सोचता है कि वह किसी सामान को नहीं खरीद सकता तो उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है। अर्थात उसके दिमाग में नकारात्मक विचार जाते हैं और वह सोचना बंद कर देता है। यदि वही हम दूसरी और देखें कि हम उस सामान को कैसे खरीद सकते हैं तो हमारे मन में एक प्रश्नवाचक चिन्ह आ जाता है कि आखिर हम इस सामान को कैसे खरीदें और हम उस पर सोचने लगते हैं। अर्थात इससे यह पता चलता है कि हमें अपने दिमाग को नकारात्मक विचार बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। हमें सदैव सकारात्मक विचार ही देने चाहिए, जिससे कि हमारा दिमाग हमेशा एक्टिव रहेगा और लगातार वह मजबूत होता जाएगा।

दुनिया में सभी पैसे को सहेज कर रखते हैं, सबको पैसा सहेज कर रखना बहुत अच्छी तरह से आता है। पर यहां इसका यह अर्थ नहीं है कि पैसे एक अलमारी या गुल्लक में रखना हो या बैंक में रखना हो। अर्थात सहज का अर्थ क्या है कि हमें पैसे कहां पर इन्वेस्ट करना है, कहां पर खर्च करना है, जिससे कि हमारी आय बनी रहे और हम पैसे को इन्वेस्ट करते रहें। तो हमें इस बात को समझना चाहिए पैसे कहां पर इन्वेस्ट करना है और कहां पर नहीं। यदि इन्वेस्ट अच्छी जगह पर होगी तो इनकम भी अच्छी रहेगी।

“निराशावादी व्यक्ति पवन के बारे में शिकायत करता है; आशावादी इसका रुख बदलने की आशा करता है; लेकिन यथार्थवादी पाल को अनुकूल बनाता है।” विलियम आर्थर वार्ड
“The pessimist complains about the wind; the optimist expects it to change; the realist adjusts the sails.” William Arthur Ward

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