बीसवीं सदी : राहुल सांकृत्यायन द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Beesvi Sadi : by Rahul Sankrityayan Hindi PDF Book

बीसवीं सदी : राहुल सांकृत्यायन द्वारा हिन्दी पीडीएफ़ पुस्तक | Beesvi Sadi : by Rahul Sankrityayan Hindi PDF Book
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name बीसवीं सदी / Beesvi Sadi
Author
Category
Pages 176
Quality Good
Size 4 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : यह बिचारते हुए मैंने अपनी चीर साहियोगिनी गुफासे बिदा ली। ३५ – ३६ हाथ उपर की अपनी गुफासे नीचे आने मे मुझे बलि कठिनाई मालुम हुई। अरे मेरे कपट्टे का पता नहीं वह कब सट्ठ गल गया ? आदमियों मे जाना है बदन ढाकने लिए वस्त्र तो नितांत आवशयक है। यह विचारकर मैंने झट एक वृक्ष से बैठे
बैठे पत्ते……….

Pustak Ka Vivaran : Yah bichaarate hue mainne apani cheer saahiyoginee guphaase bida lee. 35 – 36 haath uparakee apanee guphaase neeche aane me mujhe bali kathinaee maalum huee. are mere kapattheka pata nahin vah kab sathth gal gaya? aadamiyon me jaana hai badan dhaakane lie vastr to nitaant aavashayak hai. yah vichaarakar mainne jhat ek vrksh se baithe baithe patte………….

Description about eBook : While thinking this, I took my cheat on Sahiyogini’s cave. 35 – 36 I got a lot of difficulty in handing down my cave from my cave. Hey, my uncle, did not know when he was gone? It is necessary for men to wear the garment to cover the body. By thinking of this I immediately sat sitting with a tree…………..

“सफलता का एक ही सूत्र है और वह जब अन्य हिम्मत हार चुके हों तो भी आप डटे रहते हैं।” ‐ विलियम फैदर
“Success seems to be largely a matter of hanging on after others have let go.” ‐ William Feather

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