सीडियां , माँ और उसका देवता : भगवान दास मोरवाल | Sidiyan , Maa Aur Uska Devta : By Bhagwan Das Morwal Hindi Book
सीडियां , माँ और उसका देवता पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : हिन्दी कहानियों की दुनिया में नए प्रकार की सामाजिकता का प्रवेश तेजी से हो रहा है। समाज के ऐसे-ऐसे अंश साहित्य में अपनी जगह माँग रहे हैं जिनके बारे में कभी चर्चा तक नहीं होती थी। पहले ऐसे अँधेरे कोनों के बारे में कोई रचना आ जाती थी तो उसे अनूठा मान लिया जाता था। आज वैसे गुमनाम कोनों के बारे में लिखनेवालों की तादाद बढ़ी है। और तो और ये गुमनाम कोने खुद लिखने-बोलने भी लगे हैं भगवानदास मोरवाल ऐसे अँधेरे बन्द कोनों को रोशन करने और उन्हें जीवन्त बनाने के लिए जाने जाते हैं हिन्दी कहानी को अपने विरल अनुभवों से समृद्ध करनेवाले नामों में उनका नाम भी अहमियत रखता है।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | सीडियां , माँ और उसका देवता | Sidiyan , Maa Aur Uska Devta |
| Author | Bhagwan Das |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Entertainment Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 232 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न पूछिए – मैं यह क्यों कर रहा हूं, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो पाऊंगा। जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तब आगे बढ़ें।” चाणक्य
“Before you start some work, always ask yourself three questions – Why am I doing it, What the results might be and Will I be successful. Only when you think deeply and find satisfactory answers to these questions, go ahead.” Chanakya
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