Maa Ka Dhyan Rakhna : By Kyung-Shuk Shin Hindi Book | माँ का ध्यान रखना : क्यूंग-शुक शिन द्वारा हिंदी पुस्तक
माँ का ध्यान रखना पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : सारा परिवार तुम्हारे सबसे बड़े भाई योंग-चोल के घर पर इकट्ठा है, सब आपस में विचार कर रहे हैं कि माँ को कैसे ढूंढा जाए। तुम छोटे-छोटे पर्चे बनाकर उन्हें यहाँ बाँटने का फैसला करती हो जहाँ माँ आखिरी बार देखी गयी थी। पहला काम, सभी राज़ी होते हैं, पर्चे का मजमून तैयार करना है। यकीनन, इस तरह के संकट का सामना करने के लिए पर्चे बनाना और बाँटना पुराने किस्म का उपाय है। लेकिन गुमशुदा व्यक्ति का परिवार बहुत कुछ कर नहीं सकता और गुमशुदा व्यक्ति तुम्हारी अपनी माँ है, कोई और नहीं। बस, यही किया जा सकता है कि गुमशुदा व्यक्ति के बारे में रिपोर्ट लिखा दी जाये, उस इलाके में छान-बीन की जाये और राह चलतों से पूछा जाय कि क्या उन्होंने उस जैसी दिखने वाली किसी महिला को देखा है। तुम्हारा छोटा भाई, जो एक ऑन लाइन कपड़ों की दुकान का मालिक है, कहता है कि उसने नेट पर माँ की गुमशुदगी के बारे में कुछ जारी किया है, यह बताते हुए कि वह कहाँ गुम हुई थी उसने माँ की फोटो नेट पर अपलोड कर दी है और लोगों से अनुरोध किया है कि अगर उन्होंने उसे देखा हो तो परिवार से संपर्क करें। तुम उसे उन जगहों में खोजने जाना चाहती हो जहाँ तुम्हारा खयाल है कि वह हो सकती है, लेकिन तुम्हें पता है वह कैसी है वह अपने बल पर इस शहर में कहीं नहीं जा सकती। योंग-चोल तुम्हें पर्चे का मजमून तैयार करने का काम सौंपता है, चूँकि तुम लिखकर रोज़ी-रोटी कमाती हो। तुम्हारा चेहरा लाल हो जाता है, मानो तुम्हें ऐसा काम करते पकड़ लिया गया हो जो तुम्हें नहीं करना चाहिए तुम्हें भरोसा नहीं है कि तुम्हारे शब्द माँ को ढूंढने में कितने मददगार साबित होंगे।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | माँ का ध्यान रखना | Maa Ka Dhyan Rakhna |
| Author | Shin Kyung-sook |
| Category | Literature Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 228 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“सफलता अपने सामर्थ्य को साकार करना है। जीवन का केवल इंतज़ार भर न करें – इसे जीएं, सराहें, चखें, महकें और महसूस करें।” जो केप्प
“Success is living up to your potential. Don’t just show up for life – live it, enjoy it, taste it, smell it, feel it.” Joe Kapp
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