Aao Maa! Ham Pari Ho Jayen : By Rohini Agarwal Hindi Book | आओ माँ! हम परी हो जायें : रोहिणी अग्रवाल द्वारा हिंदी पुस्तक

Aao Maa! Ham Pari Ho Jayen : By Rohini Agarwal Hindi Book | आओ माँ! हम परी हो जायें : रोहिणी अग्रवाल द्वारा हिंदी पुस्तक
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आओ माँ! हम परी हो जायें पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : प्रतिष्ठित आलोचक एवं कहानीकार रोहिणी अग्रवाल का यह दूसरा कहानी संग्रह है। इसकी कहानियों के केंद्र में है स्त्री-भीतर और बाहर के अंधेरे और जड़ताओं से जूझती हुई। घर-परिवार की चौहद्दियों में परंपरा और आस्था के ताने-बाने से बुने गए संबंधों और वर्जनाओं से बाहर निकलकर यह अपनी सांसों और सपनों पर अधिकार पा लेना चाहती है। संबंधों का अस्वीकार नहीं, संबंधों की पुनर्संरचना का जिद्दी आग्रह ।
अपने जीवन के किसी न किसी पक्ष को खोलने खंगालने के बहाने यह स्त्री कहानी -दर-कहानी विचार के धरातल पर पितृसत्तात्मक व्यवस्था के षड्यंत्रों को बेनकाब करती है। इस प्रक्रिया में अनुभव और संवेदना की आंतरिक जमीन पर खड़ी होकर इन्हें मानवीय संदर्भ में चीन्हने की गुहार लगाती है।प्रतिष्ठित आलोचक एवं कहानीकार रोहिणी अग्रवाल का यह दूसरा कहानी संग्रह है। इसकी कहानियों के केंद्र में है स्त्री-भीतर और बाहर के अंधेरे और जड़ताओं से जूझती हुई। घर-परिवार की चौहद्दियों में परंपरा और आस्था के ताने-बाने से बुने गए संबंधों और वर्जनाओं से बाहर निकलकर यह अपनी सांसों और सपनों पर अधिकार पा लेना चाहती है। संबंधों का अस्वीकार नहीं, संबंधों की पुनर्संरचना का जिद्दी आग्रह ।
अपने जीवन के किसी न किसी पक्ष को खोलने खंगालने के बहाने यह स्त्री कहानी -दर-कहानी विचार के धरातल पर पितृसत्तात्मक व्यवस्था के षड्यंत्रों को बेनकाब करती है। इस प्रक्रिया में अनुभव और संवेदना की आंतरिक जमीन पर खड़ी होकर इन्हें मानवीय संदर्भ में चीन्हने की गुहार लगाती है।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name आओ माँ! हम परी हो जायें | Aao Maa! Ham Pari Ho Jayen
Author
CategoryFamily Relationships Book in Hindi PDF Literature Book in Hindi Story Book PDF in Hindi
Language
Pages 168
Quality Good
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“संसार एक कड़वा वृक्ष है, इसके दो फल ही अमृत जैसे मीठे होते हैं – एक मधुर वाणी और दूसरी सज्जनों की संगति।” ‐ चाणक्य
“This world is a bitter tree, it has only two sweet nectar like fruits – one is soft voice and the other is company of gentlemen.” ‐ Chanakya

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