देवयानी का कहना है : रमेश बक्षी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – नाटक | Devyani Ka Kahna Hai : by Ramesh Bakshi Hindi PDF Book – Drama (Natak)

देवयानी का कहना है : रमेश बक्षी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - नाटक | Devyani Ka Kahna Hai : by Ramesh Bakshi Hindi PDF Book - Drama (Natak)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name देवयानी का कहना है / Devyani Ka Kahna Hai
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 126
Quality Good
Size 3 MB
Download Status Available

देवयानी का कहना है का संछिप्त विवरण : परदा उठने पर दिखाई दता है कि साधन एक कील ठोककर कैलेंडर टांग रहा है। सीटी बजाते हुए वह श्लासजार मे तैरती मछली के लिए पैकेट मे से खाना डालता है। पास रखे लेप-शेड को जलाकर देखता है कमरे में टहलता है । फिर सिगरेट जलाता है और सोफे पर जा बैठता है। श्रृंगार मेज के सामने जाकर वाल ठीक करता है तथा….

Devyani Ka Kahna Hai PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Parada uthane par dikhai data hai ki sadhan ek keel thokakar Calendar tang raha hai. Seeti bajate huye vah shlasajar me tairati Machhali ke liye paicket me se khana dalata hai. Pas Rakhe lep-shed ko jalakar dekhata hai kamare mein tahalata hai . Phir sigaret jalata hai aur sophe par ja baithata hai. Shrinagar mej ke Samane jakar val theek karata hai tatha………
Short Description of Devyani Ka Kahna Hai PDF Book : On lifting the curtain, it appears that the instrument is hanging the calendar with a nail. Whistling, he puts food from the packet for the fish floating in the Schlaszar. Burns the coat-shed kept nearby and walks into the room. Then he burns a cigarette and sits on the couch. The makeup makes the wall fit in front of the table and………
“ऐसा नहीं है कि कार्य कठिन हैं इसलिए हमें हिम्मत नहीं करनी चाहिए, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम हिम्मत नहीं करते हैं इसलिए कार्य कठिन हो जाते हैं।” ‐ सेनेका
“It is not because things are difficult that we do not dare; it is because we do not dare that things are difficult.” ‐ Seneca

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