धर्मशास्त्र साहित्य में अपराध एवं दंड विधान : डॉ विभा | Dharma Shastra Sahitya Mein Aparadh Evam Dand Vidhan : by Dr. Vibha Hindi PDF Book

पुस्तक का विवरण / Book Details
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“इस दुनिया में कौन आज़ाद है? ऐसा बुद्धिमान व्यक्ति जो स्वयं पर नियत्रंण रखता है।” – होरेस
“Who then is free? The wise man who can command himself.” – Horace

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धर्मशास्त्र साहित्य में अपराध एवं दंड विधान : डॉ विभा द्वारा हिंदी पीडीऍफ पुस्तक | Dharma Shastra Sahitya Mein Aparadh Evam Dand Vidhan : by Dr. Vibha Hindi PDF Book

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पुस्तक का नाम / Name of Book : धर्मशास्त्र साहित्य में अपराध एवं दंड विधान / Dharma Shastra Sahitya Mein Aparadh Evam Dand Vidhan

पुस्तक के लेखक / Author of Book : डॉ विभा / Dr. Vibha

पुस्तक की भाषा / Language of Book : हिंदी / Hindi

पुस्तक का आकर / Size of Ebook : 50.0 MB

कुल पन्ने / Total pages in ebook : 186

पुस्तक डाउनलोड स्थिति / Ebook Downloading Status  : Best 

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पुस्तक का विवरण : सर्वांग समृद्ध संस्कृत साहित्य में बहुआयामी सामाजिक कालोकधर्मी यथार्थ चित्रण प्राप्त होता है| इसके विशाल धर्मशास्त्र साहित्य में पुरातन भारतीय जन-जीवन भी अनस्प्रष्ट नहीं रहा है………….

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Description about eBook : In the richly rich Sanskrit literature, multi-dimensional socially secular realization is obtained. In its vast theology literature, the ancient Indian life of life has not been unheard of………………

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One Quotation / एक उद्धरण
“अपने जीवन के परिष्कार और सुधार में अपने आप को इतना व्यस्त रखें कि आपके पास दूसरों की आलोचना करने का वक्त ही न हो।”
– एच जैक्सन ब्राउन, जूनिय


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“Let the refining and improving of your own life keep you so busy that you have little time to criticize others.”
– H Jackson Brown, Jr.

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