दुनिया में पितृसत्ता का जन्म कैसे हुआ : युवल नोआह हरारी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Duniya Mein Pitrasatta Ka Janma Kaise Hua : by Yuval Noah Harari Hindi PDF Book – Social (Samajik)

दुनिया में पितृसत्ता का जन्म कैसे हुआ : युवल नोआह हरारी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Duniya Mein Pitrasatta Ka Janma Kaise Hua : by Yuval Noah Harari Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name दुनिया में पितृसत्ता का जन्म कैसे हुआ / Duniya Mein Pitrasatta Ka Janma Kaise Hua
Author
Category, , ,
Language
Pages 11
Quality Good
Size 409 KB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : संस्कृति यह कहती है कि वह केवल वे चीजें मना करती है जो अप्राकृतिक है। मगर जीव विज्ञान की नजर से तो कुछ भी अप्राकृतिक नहीं है। जो कुछ भी प्रकृति में संभव है, वह प्राकृतिक है. वास्तविक रूप से अगर कोई व्यवहार अप्राकृतिक है , यानी वह प्रकृति खिलाफ है, तो उसका अस्तित्व ही हो सकता, इसलिए उसे निषेध करने की जरुरत ही नई पड़ेगी……

Pustak Ka Vivaran : Sanskrti yah kahati hai ki vah keval ve cheejen mana karati hai jo aprakrtik hai. Magar jeev vigyan kee najar se to kuchh bhee aprakrtik nahin hai. Jo kuchh bhee prakrti mein sambhav hai, vah prakrtik hai. vastavik roop se agar koi vyavahar aprakrtik hai , yani vah prakrti khilaph hai, to usaka astitv hee ho sakata, isaliye use nishedh karane kee jarurat hee naye padegi…………

Description about eBook : Culture says that it only forbids things that are unnatural. But nothing is unnatural from the point of view of biology. Whatever is possible in nature, it is natural. In reality, if any behavior is unnatural, that is, it is against nature, then it can exist, so the need to prohibit it will be new…………

“वह व्यक्ति समर्थ है जो यह मानता है कि वह समर्थ है।” ‐ बुद्ध
“He is able who thinks he is able.” ‐ Buddha

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