कृषि भूगोल : पं० रामनारायण मिश्र द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कृषि | Krishi Bhoogol : by Pt. Ramnarayan Mishra Hindi PDF Book – Agriculture (Krishi)

कृषि भूगोल : पं० रामनारायण मिश्र द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कृषि | Krishi Bhoogol : by Pt. Ramnarayan Mishra Hindi PDF Book – Agriculture (Krishi)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name कृषि भूगोल / Krishi Bhoogol
Author
Category, ,
Language
Pages 451
Quality Good
Size 15 MB
Download Status Available

कृषि भूगोल का संछिप्त विवरण : बहुत लोगों का मानना है कि मानसूनी निचले उष्ण प्रदेशों में बहुत अधिक खाद्य सामग्री नहीं पाई जाती है। वहां की भूमि भी सदैव के लिए उर्वरा तथा उपजाऊ नहीं बनती है। सदैव वर्षा होते रहने तथा वनस्पति के उगने के कारण उसकी उर्वरा शक्ति का हास होता रहता है और इस प्रकार वहां उपज धीरे-धीरे कम होती जाती है……….

Krishi Bhoogol PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Bahut Logon ka Manana hai ki Mansooni Nichale ushn pradeshon mein bahut adhik khady samagri nahin pai jati hai. Vahan ki bhoomi bhi Sadaiv ke liye urvara tatha upajaoo nahin banati hai. Sadaiv Varsha hote rahane tatha vanaspati ke ugane ke karan usaki urvara shakti ka hras hota rahata hai aur is prakar vahan upaj dheere-dheere kam hoti jati hai……….
Short Description of Krishi Bhoogol PDF Book : Many people believe that much food is not found in the monsoon lowland regions. The land there also does not become fertile and fertile forever. Due to continuous rains and growing of vegetation, the fertility of its fertility continues to decline and thus the yield there gradually decreases …….
“जब मैं पांच साल का था, मेरी मां हमेशा मुझे सिखाती थी कि खुशी जीवन की कुंजी है। जब मैं स्कूल गया, उन्होंने मुझसे पूछा कि जब मैं बड़ा होने पर क्या बनना चाहता था। मैंने लिखा – ‘खुश’। तो उन्होंने मुझे बताया कि मैंने पाठ ठीक से नहीं समझा, और मैंने उन्हें बताया कि उन्होंने जीवन को ठीक से नहीं समझा।” – जॉन लेनन
“When I was 5 years old, my mother always told me that happiness was the key to life. When I went to school, they asked me what I wanted to be when I grew up. I wrote down ‘happy’. They told me I didn’t understand the assignment, and I told them they didn’t understand life.” – John Lennon

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