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मैं महात्मा नहीं हूँ / Main Mahatma Nahin Hun

मैं महात्मा नहीं हूँ : विष्णु प्रभाकर द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - इतिहास | Main Mahatma Nahin Hun : by Vishnu Prabhakar Hindi PDF Book - History (Itihas)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मैं महात्मा नहीं हूँ / Main Mahatma Nahin Hun
Author
Category, , ,
Language
Pages 114
Quality Good
Size 3.3 MB

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विवरण : गांधीजी बंगलौर मे ठहरे हुए थे । एक दिन एक स्त्री थाली में नारियल, केले, पान, सुपारी और फूल आदि लेकर आई। वह सब सामग्री उसने गांधीजी के पैरों के पास रख दी और चरण छूकर सामने खडी हो गई। गांधीजी ने उत्तर में हाथ जोडे | वह बहन उसी तरह खडी रही । गांधीजी ने दूसरी बार हाथ जोड़े, तीसरी बार हाथ जोडे, लेकिन वह बहन वहाँ से नही………

Pustak Ka Vivaran : Gandhi Ji Bangalaur me thahare huye the. Ek Din ek Stri thali mein Nariyal, kele, Pan, Supari aur phool aadi lekar aayi. Vah sab Samagri usane Gandhi ji ke pairon ke pas rakh di aur charan chhookar samane khadi ho gayi. Gandhi ji ne uttar mein hath jode. Vah bahan usi tarah khadi rahi. Gandhi ji ne doosari bar hath jode, Teesari bar hath jode, lekin vah bahan vahan se nahi………

Description about eBook : Gandhiji was staying in Bangalore. One day a woman brought coconut, banana, betel leaf, betel nut and flowers in a plate. She put all that material near Gandhiji’s feet and touched her feet and stood in front. Gandhiji folded his hands in reply. That sister stood still. Gandhiji joined hands for the second time, joined hands for the third time, but that sister is not from there…….

“केवल कॉफ़ी बनाने के लिये केमिकल इंजीनियर की नियुक्ति न करें।” – ए. मार्गोलेज़
“Don’t hire a chemical engineer to brew you a cup of coffee.” – A. Margolese

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