वे चारों : पं० पुरुषोत्तम दास गौड़ ‘कोमल’ द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – उपन्यास | Ve Charon : by Pt. Purushottam Das Guad ‘Komal’ Hindi PDF Book – Novel (Upanyas)

Book Nameवे चारों / Ve Charon
Author
Category, , , ,
Language
Pages 130
Quality Good
Size 3.8 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : इस तेज पुकार ने अक्षय का ध्यान भंग किया। यों तो, अक्षय दिनेश को सहारा दिये चल रहा था किन्तु उसका अपना सहारा भी उनके आगे जाती हुई एक युवती बनी हुई थी। अपने मित्र के सहयोगी के रूप में अक्षय की दृष्टि संदेव ही कुछ खोजने, कुछ परखने में लगी रहती थी । स्त्री की छाया दूर नहीं पास ही हो, तब पुरुष जी भर देखे नहीं, ऐसा क्यों ? इसी उधेड़बुन में पुकार सुनकर अक्षय……..

Pustak Ka Vivaran : Prem. Han Sachmuch prem ki bhavana, yauvan ke meethe ghade, apane oopar udelakar hrday ko achaitany sa kar deta hai. Us samay Ankhen k‍ya chahati hain, hrday k‍yon tadapata hai, jigar k‍yon took- took hokar aakhon mein Aansu ke roop mein nachane lagata hai ? Keval prem ke liye. Prem nas-nas mein ghul jata hai – Aankhon ki putaliyon mein sama jata hai……….

Description about eBook : Love | Yes, the feeling of love, the sweet pitcher of puberty, pours on itself makes the heart a bit unconscious. What does the eyes want at that time, why does the heart ache, why does the liver bluntly dance in the eyes as tears? Just for love. Love dissolves in the vein – enters the pupils of the eyes ………

“गुणवत्ता की कसौटी बनें। कई लोग ऐसे वातावरण के अभ्यस्त नहीं होते जहां उत्कृष्टता अपेक्षित होती है।” स्टीव जॉब्स
“Be a yardstick of quality. Some people aren’t used to an environment where excellence is expected.” Steve Jobs

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