वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam
वेदान्त दर्शन के आयाम पुस्तक के कुछ अंश : पूरे भारतीय नवजागरण काल में ‘नव-वेदान्त’ कहे जाने वाले दार्शनिक चिन्तन की प्रधानता आद्यन्त रूप से देखी जा सकती है। उस समय के दार्शनिक जो एक साथ जन नायक और समाज सुधारक भी रहे, उन्होंने मानवीय जीवन के सभी पक्षों की व्याख्या पाश्चात्य सभ्यता बोध को पूर्वपक्ष बनाते हुए ‘नव-वेदान्तवादी’ दृष्टि से किया है। जीवन और जगत् के प्रति मायावादी दृष्टिकोण का नकार और जगत् की यथातथ्यता की स्वीकृति तथा वेदान्ती विश्वदृष्टि में ही प्रगतिशील एवं रचनात्मक जीवन के लिए अधिकाधिक अवकाश निर्मित करना नव-वेदान्ती चिन्तन की प्रस्थानमूलक विशिष्टता रही है। साथ ही साथ नव-वेदान्ती चिन्तन में उन सामाजिक-सांस्कृतिक विकारों के प्रति भी एक सशक्त आत्मचेतना दिखाई पड़ती है जिन्हें वेदान्त………..
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | वेदान्त दर्शन के आयाम | Vedant Darshan Ke Aayam |
| Author | Ambika Dutt Sharma |
| Category | Social PDF Books In Hindi Spiritual PDF Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 641 |
| Quality | Good |
| Size | 143 MB |
| Download Status | Available |
“रोटी या सुरा या लिबास की तरह कला भी मनुष्य की एक बुनियादी ज़रूरत है। उसका पेट जिस तरह से खाना मांगता है, वैसे ही उसकी आत्मा को भी कला की भूख सताती है।” ‐ इरविंग स्टोन
“Art’s a staple. Like bread or wine or a warm coat in winter. Those who think it is a luxury have only a fragment of a mind. Man’s spirit grows hungry for art in the same way his stomach growls for food.” ‐ Irving Stone
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