श्री प्रेम रामायण / Shri Prem Ramayan

श्री प्रेम रामायण | Shri Prem Ramayan
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श्री प्रेम रामायण पुस्तक का कुछ अंश : श्री सीताराम रसिक प्रेमियों के पोषण के लिये बहुत से रसवर्धक ग्रंथ संत समाज में उपलब्ध हैं फिर भी मैथिल सख्य रस का साहित्य न के बराबर ही है। यद्यपि इस रस के रसिक संत सदा से कुछ होते ही आये हैं । जैसे :- मामा प्रयागदास जी इत्यादि । तथापि रस मत्त उन रसिकों द्वारा कुछ न लिखा जाना स्वाभाविक था | जब तक मुख जल के ऊपर है, तभी तक बोलना आता है, जब अथाह जल में डूब गया तब वाणी का विकास नहीं बनता । अस्तु। मैथिल सखाओं का प्रेम श्री सीताराम जी से भगिनी भाम सम्बन्ध से संबंधित होकर किस स्थिति को प्राप्त हुआ, युगल मनोहर मधुमई मूर्तियों की परिचर्या उन्होंने किस विधि से की, श्री सोताराम जी की कृपा एवं प्रीति मैथिल सखाओं पर कहाँ तक कैसी रही; इत्यादि विषयों की जानकारी साहित्य द्वारा………

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name श्री प्रेम रामायण / Shri Prem Ramayan
Author
CategoryReligious Books in Hindi PDF Ramayan Book in Hindi Spiritual PDF Book in Hindi
Language
Pages 773
Quality Good
Size 115 MB
Download Status Available
“मृत्यु के डर के निवारण का शायद सर्वोत्तम उपाय इस बात पर विचार करने में है कि जीवन की एक शुरुआत होती है और एक अंत होता है। एक समय था जब आप नहीं थे: उससे हमे कोई मतलब नहीं होता। तो फिर हमें क्यों तकलीफ होती है कि ऐसा समय आएगा जब हम नहीं होंगे? मृत्यु के बाद सब कुछ वैसा ही होता है जैसा हमारे जन्म से पहले था।” विलियम हज़्लिट्ट
“Perhaps the best cure for the fear of death is to reflect that life has a beginning as well as an end. There was a time when you were not: that gives us no concern. Why then should it trouble us that a time will come when we shall cease to be? To die is only to be as we were before we were born.” William Hazlitt

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