ईट दैट फ्रॉग : ब्रायन ट्रेसी द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Eat That Frog : by Brian Tracy Hindi Audiobook

ईट दैट फ्रॉग : ब्रायन ट्रेसी द्वारा हिंदी ऑडियो बुक | Eat That Frog : by Brian Tracy Hindi Audiobook
पुस्तक का विवरण / Book Details
AudioBook Name ईट दैट फ्रॉग / Eat That Frog
Author
Category, ,
Language
Duration 3:07 hrs
Source Youtube

Eat That Frog Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : यह पुस्तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि ये विचार मेरी और हजारों दूसरे लोगों की तरह ही आपकी भी मदद करेंगे। दरअसल मुझे पूरी उम्मीद है कि यह पुस्तक आपकी ज़िंदगी बदल देगी हमेशा के लिए। आपको बहुत से काम किये हैं लेकिन उन सबको करने के लिए आपके पास कभी पर्याप्त समय नहीं होता। आप काम व्यक्तिगत जिम्मेदारियों और प्रोजेक्ट्स के बोझ तले दबे रहते हैं। आप ऐसी पत्रिकाओं और पुस्तकों का ढेर लगाते रहते हैं जिन्हें आप सारे काम निबटाने के बाद फुरसत में पढ़ना चाहते हैं। लेकिन सच तो यह है कि आपको कभी फुरसत तभी मिलेगी। आप कभी अपने सारे काम पूरे नहीं कर पाएंगे। आप कभी उस मुकाम तक नहीं पहुँच पाएँगे जहाँ उन सभी पुस्तकों पत्रिकाओं और फुरसत के वक़्त की गतिविधियों के लिए समय निकाल पाएँ जिनके आप सपने देखते हैं। ज्यादा मेहनत करके समय प्रबंधन की समस्याएँ सुलझाने की बात भूल जाएँ। चाहे आप व्यक्तिगत उत्पादकता या मेहनत की कितनी ही तकनीकों में माहिर हो जाएँ आप उपलब्ध समय में जितना काम कर सकते हैं काम हमेशा उससे ज्यादा ही रहेगा। और ही इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितना समय उपलब्ध रहता है। लेकिन आप अपने समय और ज़िंदगी पर काबू कर सकते हैं। बस शर्त यह है कि आपको अपने सोचने और काम कलले के तरीकों को बदलना होगा। आपको जिम्मेदारियों की अंतहीन गहराई वाली उस नदी से निबटने का तरीका बदलना होगा जो हर दिन आपको डुबो देती है। अपने कामों और गतिविधियों पर काबू करने का तरीका क्या है? ज्यादातर गतिविधियों को छोड़ दें और सिर्फ़ उन्हीं चुनिंदा कामों में ज्यादा समय लगाएँ जिनसे आपकी ज़िंदगी सचमुच बदल सकती है।
मैं पिछले तीस साल से समय प्रबंधन का अध्ययन कर रहा हूँ। मैंने पीटर ड्रकर, एलेक मैकेंजी, एलन लेकीन, स्टीफन कवी और बहुत से अन्य लेखकों की पुस्तकों में बार-बार गोता लगाया है। मैंने व्यक्तिगत कार्यकुशलता और प्रभावकारिता बढ़ाने के विषय पर सैकड़ों पुस्तकें व हजाएँं लेख पढ़े हैं। यह पुस्तक इसी का नतीजा है। जब भी मुझे कोई अच्छा विचार मिलता था तो मैं उसे हर बार अपने कामकाज और निजी ज़िंदगी में आजमाकर देखता था। अगर वह कारगर साबित होता तो मैं उसे अपने भाषणों और सेमिनारों में शामिल करके दूसरों को सिखाने लगता था। गैलिलियो ने कहा था “आप किसी को कुछ सिखा नहीं सकते; आप तो बस इसे उसके भीतर खोजने में उसकी मदद कर सकते हैं। ”
आपको ये विचार जाने-पहचाने लगते हैं या नहीं यह आपके ज्ञान और अनुभव के स्तर पर निर्भर करता है। वैसे आपकी स्थिति चाहे जो हो यह पुस्तक आपको उनके बारे में ज्यादा जागरूक बना देगी। इन विधियों और तकनीकों को बार-बार सीखें। इन पर तब तक अमल करते रहें जब तक कि वे आपकी आदत न बन जाएं। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आप बहुत सकारात्मक अंदाज में अपनी ज़िंदगी का रुख बदल लेंगे।
लिखित लक्ष्यों की शक्ति
मैं आपको इस पुस्तक की शुरुआत में अपने बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। मेरी ज़िंदगी बढ़े अभावों के साथ शुरू हुईं। बस एक ही अच्छी बात थी कि मैं जिज्ञासु प्रवृत्ति का था। स्कूल में मेरा प्रदर्शन हमेशा खराब रहा। नतीजा यह हुआ कि मैंने पढ़ाई अधूरी छोड़ दी। फिर मैंने कई सालों तक मजदूरी की। मेरा भविष्य कतई उज्ज्वल नहीं दिख रहा था। युवावस्था में मुझे एक समुद्री जहाज पर काम करने का अवसर हाथ लग गया। बस फिर क्या था मैं दुनिया देखने चल दिया! आठ साल तक मैंने सफर किया काम किया और दोबारा सफर किया। यह सिलसिला खत्म होने तक मैं पाँच महाद्विपों के अस्सी देशों में घूम चुका था। जब मुझे मजदूरी का काम मिलना बंद हो गया तो मैं सेल्स लाइन में चला गया। मैंने लोगों के दरवाजे खटखटाए और कमीशन पर काम किया। मैं समान नहीं बेच पा रहा था और जूझ रहा था, जब तक कि मैंने ख़ुद से यह सवाल नहीं पूछा “दूसरे लोग आखिर मुझसे बेहतर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?” फिर मैंने एक ऐसा तरीका आजमाया जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी। मैं सफल लोगों से पूछने लगा कि वे आखिर ऐसा क्या करते हैं जिसकी बदौलत वे मुझसे ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करने और ज्यादा कमाई कले में कामयाब होते हैं। उन्होंने मुझे बता दिया। मैंने उनकी सलाह पर पूरा अमल किया। नतीजा? मेरी बिक्री बढ़ गई। आखिरकार मैं इतना कामयाब हो गया कि मुझे सेल्स मैनेजर बना दिया गया। सेल्स मैनेजर बनने के बाद भी मैं इसी नीति परचला। मैंने सफल मैनेजरों से पूछा कि कामयाब होने और असरदार नतीजे हासिल कल के लिए वे क्‍या करते हैं। उन्होंने जो तकनीकें बताईं, मैं उठ पर अमल करने लगा। लगभग फौल ही मुझे भी उनके जैसे ही नतीजे मिलने लगे। सीखने और सीखी हुई बातों पर अमल कले की इस प्रक्रिया ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। मैं अब भी हैरान हूँ कि यह सब कितना सरल और स्पष्ट है। बस यह पता लगा लें कि उस क्षेत्र के सफल लोग क्या करते हैं और फिर वही काम करने लगें जब तक कि आपको भी वही नतीजे न मिलने लगें। विशेषज्ञों से सीखें। वाह! कितना बेहतरीन विचार है?
सफलता की भविष्यवाणी संभव है
सरल भाषा में कहें तो कुछ लोग दूसरों से बेहतर प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे चीजों को अलग दंग से करते हैं। वे सही चीजों को सही ढंग से करते हैं। यहाँ एक बात ख़ास तौर पर उभरकर सामने आती है : कामयाब सुखी और समृद्ध लोग आम आदमी के मुकाबले अपने समय का बेहतर इस्तेमाल करते हैं। असफलता की पृष्ठभूमि की वजह से मुझमें हीनता और अक्षमता की भावनाएँ बहुत गहरी थीं। मैं इस ग़लतफ़हमी के मानसिक जाल में फँस चुका था कि मुझसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले लोग वाकई मुझसे बेहतर हैं। बाद में मुझे पता चला कि यह हमेशा सच नहीं था। वे तो बस चीजों को अलग तरीके से कर रहे थे। जो कार्यशैली उन्होंने सीखी थी उसे मैं भी बखूबी सीख सकता था। इससे मेरी आँखें खुल गईं। मैं इस खोज से हैरान भी था और रोमांचित भी। आज भी हूँ! मुझे एहसास हो गया कि मैं अपनी ज़िंदगी बदल सकता हूँ और लगभग हर लक्ष्य हाप्तिल कर सकता हूँ बशर्ते मैं यह पता लगा लूँ कि उस क्षेत्र के सफल लोग क्या कर रहे हैं। फिर ख़ुद भी वही करे लूँ। इस तरह मुझे भी शर्तिया वही परिणाम मिलेंगे, जो उन्हें मिल रहे थे। सेल्स लाइन में आने के एक साल के भीतर ही मैं शीर्षस्थ सेल्समैन बन गया। उसके ‘एक साल बाद मैनेजर। तीन साल के भीतर वाइस प्रेसिडेंट। अब मैं छह देशों में कार्यरत 95 सेल्सपर्सन का बॉस था। उस वक़्त मेरी उम्र सिर्फ़ पच्चीस साल थी। अब तक मैं बाईंस अलग-अलग काम-धंधे कर चुका हूँ। मैंने कई कंपनियाँ शुरू कीं। ‘एक बड़ी यूनिवर्सिटी से बिज़नेस डिग्री ली। फ्रेंच जर्मन और स्पेनिश भाषाएँ सीखीं। अब तक मैं ,1000 से ज्यादा कंपनियों में वक़्ता प्रशिक्षक या परामर्शदाता की भूमिका निभा चुका हूँ। आजकल मैं हर वर्ष 2,50,000 से ज्यादा लोगों के सामने भाषण या सेमिनार देता हूँ जिनमें कई मर्तबा तो एक बार में 20,000 लोग होते हैं।
एक सरल सच्चाई
अपने पूरे कैरियर में मैंने एक सरल सच्चाई खोजी है और बार-बार खोजी है। महान कामयाबी, उपलब्धि सम्मान ओहदे और जीवन की खुशी की कुंजी क्या है? अपने सबसे महत्वपूर्ण काम पर एकाग्रता से ध्यान केंद्रित करने उसे अच्छी तरह करने और उसे पूरा करने की काबिलियत। यह सिद्धांत ही इस पुस्तक की जान है। यह पुस्तक बताएगी कि आप अपने कैरियर में ज्यादा तेजी से आगे कैसे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा इसमें यह भी बताया जाएगा कि आप अपनी निजी ज़िंदगी को बेहतरीन कैसे बना सकते हैं। मैंने इसमें व्यक्तिगत प्रभावकारिता पर ख़ुद के खोजे हुए सबसे असरदार सिद्धांत शामिल किए हैं।
ये विधियाँ तकनीकें और रणनीतियाँ व्यावहारिक हैं आजमाई हुई हैं और फटाफट परिणाम देती हैं। यह पुस्तक समय बचाने के बारे में है इसलिए मैं टालमटोल या समय कुप्रबंधन के मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारणों को विस्तार से बताकर समय खराब नहीं करूँगा। मैं सैद्धांतिक बातों या शोध पर भी ज्यादा लंबी बातचीत नहीं करूँगा। यहाँ तो आप प्तिर्फ़ कुछ निश्चित कदमों के बारे में जानेंगे जिजें आप फौरन उठा सकते हैं। इनकी बदौलत आपको कामकाज में बेहतर नतीजे तत्काल मिलने लगेंगे और आप ज्यादा खुश रहने लगेंगे। इस पुस्तक में हमने जितने भी विचार दिए हैं उन सभी का बुनियादी मकसद आपकी उत्पादकता प्रदर्शन और परिणामों को बढ़ाना है। इनका उद्देश्य आपको ज्यादा मूल्यवान बनाना है। इनमें से कई विचारों को आप अपनी निजी ज़िंदगी में भी लागू कर सकते हैं। इक्कीस तकनीकों में से प्रत्येक अपने आप में संपूर्ण है। ये सभी जरूरी हैं। हो सकता है कि किसी स्थिति में कोई एक रणनीति कारगर हो और किसी दूसरी स्थिति में दूसरी रणनीति। एक तरह से ये इक्कीस विचार व्यक्तिगत प्रभावकारिता तकनीकों की दावत जैसे हैं। आप इनका इस्तेमाल कभी भी, किसी भी क्रम में कर सकते हैं…जो भी आपको उस पल सही लगे। सफलता की कुंजी है कर्म | ये सिद्धांत आपके प्रदर्शन और परिणामों को तेजी से बेहतर बनाते हैं। आप उन्हें जितनी फुर्ती से सीखेंगे और लागू करेंगे उतनी ही तीव्रता से अपने कैरियर में आगे बढ़ेंगे – पक्की गारंटी है !
”जब आप हर तुबह एक मेढक लता सबसे मुश्किल काम सबसे पहले कल) सीख लेंगे तो आपकी भावी सफलता की कोई सीमा नहीं होगी !”

“मानवता के दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम आपकी स्वयं की चिंताओं को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।” ‐ स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी
“Every step taken toward humanity will prove a milestone in mitigating your own worries.” ‐ Swami Shri Sudarshnacharya ji

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