पर्वत – पुरुष दशरथ माँझी : सुनील कुमार सिन्हा | Parvat – Purush Dashrath Manjhi : By Sunil Kumar Sinha Hindi Book
पर्वत – पुरुष दशरथ माँझी पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : पर्वत-पुरुष दशरथ माँझी की यह कथा सुन मैं भी औरों की तरह अवाक् रह गया। क्या सचमुच ऐसा हो सकता है? पर यह असंभव सा लगनेवाला प्रश्न बेमानी हो चुका था। दशरथ माँझी ने इसका जवाब अपनी बूढ़ी, पर कभी न थकती हड्डियों से दे दिया था। एक सम्मोहन सा उसके व्यक्तित्व के प्रति मन में जाग्रत् हो चुका था, जिसमें पूरी तरह श्रद्धा शामिल थी। फिर कलम लेकर बैठ गया और जो आड़ी- तिरछी मार सका, वही कविता तथा कथ्य की शक्ल में सामने है। इस कथ्य को तैयार करने में श्री कमल नयन, जो दशरथ माँझी के जिले के रहनेवाले हैं, ने कई तथ्यों एवं अनजाने पहलुओं से अवगत करा इसे परिपूर्ण करने में अपनी सार्थक भूमिका निभाई है। मैं उनके प्रति आभारी हूँ।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | पर्वत - पुरुष दशरथ माँझी | Parvat - Purush Dashrath Manjhi |
| Author | सुनील कुमार सिन्हा / Sunil Kumar Sinha |
| Category | Biography Book in Hindi Motivational Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 44 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“मनुष्य के सद् विवेक की अंतिम कसौटी शायद उन भावी पीढ़ियों के लिए आज कुछ त्याग करने की उसकी इच्छा ही है जिन के धन्यवाद के शब्द उसे कभी सुनाई नहीं देंगे।” ‐ गेलॉर्ड नेलसन, अमरीकी राजनीतिज्ञ
““The ultimate test of man’s conscience may be his willingness to sacrifice something today for future generations whose words of thanks will not be heard.” ‐ Gaylord Nelson, US Senator
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें












