पंचवटी : प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय | Panchvati : By Pranav Kumar Vandhyopadhyay Hindi Book
पुस्तक के कुछ अंश : रामकथा के अरण्यकांड में वर्णित आख्यान है प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय के उपन्यास पंचवटी का आधार-पीठ । सीता- हरण से पूर्व पद को पंचवटी तक की यात्रा और उसके बाद का द्वंद्व कुल मिलाकर मनुष्य के उन पड़ावों से गुजरने का अनुभव है जो पौराणिक पुरुषोत्तम से लेकर आज के व्यक्ति में समय के परिवर्तन के साथ अपने तरीके से उपस्थित है। समय बदलता है और उसके साथ परिवर्तित होता है यात्रा का स्वरूप जो कभी नहीं बदलता, वह है-मनुष्य के भीतर का अनिश्चय और संकट के अनु लेकिन प स्थितियों में इस अनुभव के साथ ही जन्म लेता है-स्वयं में विश्वास और जीवन में आस्था की किरण हर प्रकार के भाव के बौन एक ऐसा गहरा भाव अंकुर के रूप में उपजता है जो व्यक्तिको पुनर्जीवित कर एक ठोस आधार प्रदान करता
है।
रामायणको पुजन नहीं, उपन्यास है। वह आख्यान व्यक्ति के उन प्रश्नों को संबोधित करता है, जिनके सामाजिक सरोकार का दायरा सार्वकालिक और बहुत व्यापक है। रामा को आधार बनाकर लिखा गया प्रख्यात काकार प्रणव कुमार पध्याय का यह उपन्यास समय को उन सच्चाइयों को ने का एक प्रवास है, जो हमारे भीतर और बाहर के अनवरत के पुलमिल जाने के बाद अब अपनी वास्तविक पहचान खोज रहे हैं।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | पंचवटी | Panchvati |
| Author | Pranav Kumar Bandyopadhyay |
| Category | Novel in Hindi PDF Book |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 144 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“अगर आप सही राह पर चल रहे हैं, और आप चलते रहने के लिए तत्पर हैं, तो आप अंततः प्रगति करेंगे।” ‐ बराक ओबामा
“If you’re walking down the right path and you’re willing to keep walking, eventually you’ll make progress.” ‐ Barack Obama
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