Sesha Yatra : By Usha Priyamvada Hindi Book | शेष यात्रा : उषा प्रियंवदा द्वारा हिंदी पुस्तक

Sesha Yatra : By Usha Priyamvada Hindi Book | शेष यात्रा : उषा प्रियंवदा द्वारा हिंदी पुस्तक
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शेष यात्रा पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : 
जागकर अनु कहती है, यही यथार्थ है। यथार्थ, प्रणव मुझे छोड़कर चला गया है। अब प्रणव के बिना सारी जिन्दगी काटनी होगी, सारी जिन्दगी ।
वह अँधेरे में आँख फाड़े लेटी रहती है, एकदम स्तब्ध, बिना हिले-डुले । वह अपने दिल की धड़कन महसूस कर रही है, छाती में कसा हुआ दिल, उसे अन्दर से हिलाता हुआ, झकझोरता हुआ, अपनी ही तेज गति से धक-धक-धक करता हुआ – अनु की मुट्ठियाँ ढीली पड़ जाती हैं। वह सुनती रहती है, अपने दिल की धड़कन जो कि उस अँधेरे में बहुत तेज और डरावनी लगने लगी है। वह उठकर बैठना चाहती है, पानी का एक घूँट पीना चाहती है, पर वह एकदम निःशक्त, निश्चल पड़ी रहती है। हाथ हिलाकर बत्ती तक नहीं जलाई जाती। दिन के उजाले में जो चीजें इतना त्रास नहीं देतीं, वही रात के अकेले, घुप अँधेरे में कितनी बड़ी, कितनी दुर्गम लगने लगती हैं। अकेलेपन के उस डर का भी जैसे एक रूखा-सूखा, तालू से चिपका स्वाद है, वह स्वाद अनु को एक मिनट भी नहीं छोड़ता। अब? अब? अब? उसका दिल धड़कता है और वह उस लम्बे-चौड़े पलंग पर अपनी जगह पर सिमटी-सिकुड़ी पड़ी रहती है। दोनों हाथों से चेहरे को ढके हुए, घुटनों को समेटकर पेट से चिपकाए हुए, एक आतंकित गठरी-जैसी … रात का हर पल शरीर से रिसते हुए एक-एक कतरा खून की तरह लगता है।
सड़क पर सन्नाटा है, कभी-कभी पुलिस की गश्ती गाड़ी चुपचाप निकल जाती होगी। घरों के दरवाजे बन्द हैं, सभी अपनी-अपनी गरम रजाइयों में लिपटे सो रहे होंगे, उसकी सारी सहेलियाँ भी, जो आजकल अपने-अपने घर, बच्चों और पतियों को लेकर बहुत सतर्क हो गई हैं। अनु के अन्दर से एक गहरी साँस उठती है, आँखें फाड़कर वह अंधेरे में चारों तरफ देखती है। सड़क

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name शेष यात्रा | Sesha Yatra
Author
CategoryLiterature Book in Hindi Novel Book in Hindi PDF
Language
Pages 152
Quality Good
Download Status Not for Download
“जीवन में मानव का मुख्य कार्य स्वयं का सृजन करना है, वह बनना जिसकी उसमें संभाव्यता है। उसके प्रयास का सबसे महत्त्वपूर्ण उत्पाद उसका स्वयं का व्यक्तित्व होता है।” ‐ एरिक फ्राम्म
“Man’s main task in life is to give birth to himself, to become what he potentially is. The most important product of his effort is his own personality.” ‐ Erich Fromm

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