जनसत्ता रविवारी 1 नवंबर 2015 (पानी कितना पानी है) : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – पत्रिका | Jansatta Ravivari 1 November 2015 (Pani Kitna Pani Hai) : Hindi PDF Book – Magazine (Patrika)

जनसत्ता रविवारी 1 नवंबर 2015 (पानी कितना पानी है) : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - पत्रिका | Jansatta Ravivari 1 November 2015 (Pani Kitna Pani Hai) : Hindi PDF Book - Magazine (Patrika)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name जनसत्ता रविवारी 1 नवंबर 2015 (पानी कितना पानी है) / Jansatta Ravivari 1 November 2015
Author
Category,
Language
Pages 1
Quality Good
Size 253 KB
Download Status Available

जनसत्ता रविवारी 1 नवंबर 2015 (पानी कितना पानी है) का संछिप्त विवरण : भारत में पानी की कहानी को लेकर तीखा अंतर्विरोध है। सरकार एक तरफ तो जल संरक्षण का दावा कर रही है। दूसरी तरफ, पीछे के दरवाजे से इसके बाजारीकरण और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। “निजी क्षेत्र की भागीदारी’ के नाम पर लगभग सभी राज्यों में सैकड़ों जल संबंधी पयोजनाएं चल रही हैं। राज्य और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ…….

Jansatta Ravivari 1 November 2015 PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Bharat mein Pani ki Kahani ko lekar teekha Antarvirodh hai. Sarkar ek taraph to jal sanrakshan ka dava kar rahi hai. Doosari taraph, Peechhe ke darvaje se iske Bajarikaran aur Nijikaran ko badhava de rahi hai. “Niji Kshetra ki Bhagidari ke nam par lagbhag sabhi Rajyon mein saikadon jal sambandhi Payojanayen chal rahi hain. Rajy aur Antararashtriy sansthaon ke sath….
Short Description of Jansatta Ravivari 1 November 2015 PDF Book : There is a sharp contradiction about the water story in India. On one hand, the government is claiming water conservation. On the other hand, it is promoting its marketization and privatization through the back door. Hundreds of water related projects are going on in almost all the states in the name of “Private Sector Participation”. With state and international institutions……..
“हम अपने कार्यों के परिणाम का निर्णय करने वाले कौन हैं? यह तो भगवान का कार्यक्षेत्र है। हम तो एकमात्र कर्म करने के लिए उत्तरदायी हैं।” ‐ गीता
“Who are we to decide: what will be the outcome of our actions? It is God’s domain. We are just simply responsible for the actions.” ‐ Geeta

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