जो तुम पास हमारे होते : डॉ. दिनेश गोस्वामी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – काव्य | Jo Tum Pas Hamare Hote : by Dr. Dinesh Goswami Hindi PDF Book – Poetry (Kavya)

Book Nameजो तुम पास हमारे होते / Jo Tum Pas Hamare Hote
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Language
Pages 102
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : गीत समाप्त हुआ तो ये सवाल और ज्यादा उभरकर निखरकर मेरे सामने आए। उदाहरण के तौर पर मैंने यह सोचा कि गीत की परम्परा शैली में समय एवं तीव्रता के साथ बदलते हुए मनुष्य के व्यक्तिवत तथा सामाजिक शैली में समय एवं तीव्रता के साथ बदलते हुए मनुष्य के व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन के अनुसार किसी प्रकार की और किस सीमा तक ? क्या गीत का परम्परा ढांचा…….

Pustak Ka Vivaran : Geet Samapt huya to ye sawal aur jyada ubharakar Nikharakar mere samane aaye. Udaharan ke taur par mainne yah socha ki geet kee parampara shaily mein samay evan teevrata ke sath badalate huye manushy ke vyaktivat tatha samajik shaily mein samay evan teevrata ke sath badalate huye manushy ke vyaktigat tatha samajik jeevan ke anusar kisi prakaar kee aur kis seema tak ? kya geet ka parampara dhancha………….

Description about eBook : When the song was over, these questions emerged and came out in front of me. For example, I thought that in some way and to what extent, according to the personal and social life of man, changing with time and intensity in the genre of song, changing with time and intensity in human personality and social style? What song………..

“हम वस्तुओं को जैसी हैं वैसे नहीं देखते हैं। हम उन्हें वैसे देखते हैं जैसे हम हैं।” ‐ टालमड
“We do not see things they are. We see them as we are.” ‐ Talmud

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