हिंदी संस्कृत मराठी मन्त्र विशेष

कुछ सच कुछ झूठ / Kuchh Sach Kuchh Jhoot

कुछ सच कुछ झूठ : गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Kuchh Sach Kuchh Jhoot : by Gopal Prasad Vyas Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name कुछ सच कुछ झूठ / Kuchh Sach Kuchh Jhoot
Author
Category, ,
Language
Pages 95
Quality Good
Size 8.71 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : खाना न दीजिये, कपड़ा न दीजिये, रुपया-रोजगार न दीजिये, लेकिन कृपा करके दिल खोलकर, झूठी ही सही, मेरी प्रशंसा किए जाइए, मैं आपकी जूतियों का गुलाम हूँ | उस हालत में मुझ जैसा बेदाम नौकर, बे-ठउजर चाकर, आप कहीं खोजे भी न पाइएगा | चालीस ऊपर आयुहोती ……….

Pustak Ka Vivaran : Khana na deejiye, kapada na deejiye, Rupya-Rojgar na deejiye, lekin krpa karake dil kholakar, jhoothi hee sahi, Meri prashansa kiye jaiye, main aapaki jootiyon ka Gulam hoon. Us Halat mein mujh jaisa bedam Naukar, be-ujar chakar, aap kahin khoje bhee na payega. Chalis Upar ayu hoti………….
Description about eBook : Do not give clothes, do not give clothes, do not give Rupee-employment, but by opening the heart, falsehood is right, I am praised, I am the slave of your shoe. In that condition you will not be able to find anything like meeless servant, bay-ur chakar, like me. Forty years old…………
“शुरू में वह कीजिए जो आवश्यक है, फिर वह जो संभव है और अचानक आप पाएंगे कि आप तो वह कर रहे हैं जो असंभव की श्रेणी में आता है।” – असीसी के संत फ़्रांसिस (११८२-१२२६), इतालवी साधु
“Start by doing what’s necessary; then do what’s possible; and suddenly you are doing the impossible.” – St. Francis of Assisi (1182-1226), Italian Saint

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