परिपक्क मानस : एच० ए० ओवरस्ट्रीट द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Paripakka Manas : by H. A. Ovarastrit Hindi PDF Book – Social (Samajik)

Book Nameपरिपक्क मानस / Paripakka Manas
Author
Category, , ,
Language
Pages 141
Quality Good
Size 10 MB
Download Status Available

परिपक्क मानस  पीडीऍफ़ पुस्तक का संछिप्त विवरण :  डिडरोट ने एक बार कहा था कि सारे बच्चे सार रूप से अपराधी होते है। यह हमारा
सौभाग्य ही है कि उनकी शारीरिक शक्तियां इतनी सीमित है कि उन्हें विध्वंशक कार्यों में लगाने की उनमे
सामर्थ्य नहीं। यदि डिडरोट आज जीवित होता तो वह अपने इस कथन को सम्भवत और विस्तृत करके.

Paripakka Manas PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Didrot ne ek bar kaha tha ki sare Bachche sar Roop se Aparadhi hote hai. Yah hamara Saubhagy hi hai ki unaki Sharirik shaktiyan itani seemit hai ki unhen vidhvanshak karyon mein lagane ki uname samarthy nahin. Yadi Didarot Aaj jeevit hota to vah Apane is kathan ko sambhavat aur vistrt karake………

Short Description of Paripakka Manas Hindi PDF Book  : Diderot once said that all children are fundamentally criminals. It is our good fortune that their physical powers are so limited that they do not have the ability to use them in subversive tasks. If Didrot were alive today, he might expand and expand his statement ……

 

“यदि आप एक वर्ष की व्यवस्था कर रहे हैं, तो चावल उगाएं; यदि आप एक दशक की व्यवस्था कर रहे हैं, तो वृक्ष लगाएं; अगर आप जीवनभर की व्यवस्था कर रहे हैं, तो लोगों को शिक्षा दें।” चीन की कहावत
“If you are planning for a year, sow rice; if you are planning for a decade, plant trees; if you are planning for a lifetime, educate people.” Chinese proverb

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