संकलित निबंध : हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Sankalit Nibandh : by Hazari Prasad Dwivedi Hindi PDF Book – Literature (Sahitya)

संकलित निबंध : हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Sankalit Nibandh : by Hazari Prasad Dwivedi Hindi PDF Book - Literature (Sahitya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
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“जब दूसरे व्यक्ति सोए हों, तो उस समय अध्ययन करें; उस समय कार्य करें जब दूसरे व्यक्ति अपने समय को नष्ट करते हैं; उस समय तैयारी करें जब दूसरे खेल रहे हों ; और उस समय सपने देखें जब दूसरे केवल कामना ही कर रहे हों।” विलियम आर्थर वार्ड
“Study while others are sleeping; work while others are loafing; prepare while others are playing; and dream while others are wishing.” William Arthur Ward

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Pustak Ka Naam / Name of Book : संकलित निबंध / Sankalit Nibandh Hindi Book in PDF
Pustak Ke Lekhak / Author of Book : हजारीप्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi
Pustak Ki Bhasha / Language of Book : हिंदी / Hindi
Pustak Ka Akar / Size of Ebook : 28 MB
Pustak Mein Kul Prashth / Total pages in ebook : 142
Pustak Download Sthiti / Ebook Downloading Status : Best

 

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Pustak Ka Vivaran : “Punarnava” Hazariprasad dwivedi ke ek upanyas ka nam hee nahin, unake samast rachanakarm ka beej shabd hai. vastut: Kalidas ke klesh: phalen hi Punarnevarta vidhyate ko Ddwivedi ji ne ek naye arth ke sath Punarjeevit kiya. Kalidas ki anugoonj vaise bhee unake rachana-karm mein aksar sunai padati hai; kintu punarnava mein to ve apani sarjanatmakar………

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Description about eBook : “Punarnava” is not only the name of a novel by Hazariprasad Dwivedi, but the seed word of all his works. In fact, Dwivediji revived Kalidasa’s’ Clash: Fallen He is a revivalist school with a new meaning. Kalidasa’s echoes are often heard in his creations; But in ‘Punarnava’, he created his creativity ………

 

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“उत्कृष्टता की सिद्धि तब नहीं होती जब कुछ और जोड़ना या लगाना बाकी नहीं रह जाए, बल्कि तब होती है जब कुछ हटाने के लिये नहीं बचे।”

‐ एंटोइन दे सेंट एक्जूपरि

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“Perfection is achieved, not when there is nothing more to add, but when there is nothing left to take away.”

‐ Antoine de Saint-Exupery

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