शाबर मन्त्र संग्रह भाग-3 : ऋतशील शर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – तन्त्र मन्त्र | Shabar Mantra Sangrah Part-3 : by Ritusheel Sharma Hindi PDF Book – Tantra Mantra

Book Nameशाबर मन्त्र संग्रह भाग-3 / Shabar Mantra Sangrah Part-3
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Language
Pages 66
Quality Good
Size 10 MB
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पुस्तक का विवरण : ‘शाबर मन्त्र’ सारे देश में अति प्राचीन काल से प्रचलित रहे हैं, किन्तु न तो इनके विधिवत संग्रह का प्रयास कभी किसी संस्थान द्वारा किया गया और न ही इन पर समुचित शोध करने के प्रति किसी ने ध्यान ही दिया| पहले पहल ‘कल्याण मंदिर प्रकाशन’ ने इस ओर प्रयास किया और ‘कौल – कल्पतरु चंडी’ के विशेषांको के रूप में प्रस्तुत ‘संग्रह’ का पहला भाग १६ मार्च, १९९१ को तथा दूसरा भाग १५ जनवरी, १९९२ को प्रकाशित हुआ………..

Pustak Ka Vivaran : Shabar Mantra sare desh mein ati pracheen kaal se prachalit rahe hain, kintu na to inke vidhivat sangrah ka prayas kabhi kisi sansthan dwara kiya gaya aur na hi in par samuchit shodh karne ke prati kisi ne dhyan hi diya. Pehale pahal Kalyan Mandir Prakashan ne is or prayas kiya aur Kaul – Kalpataru Chandi ke visheshaanko ke roop mein prastut sangrah ka pahala bhag 16 march, 1991 ko tatha dusra bhag 15 January, 1992 ko prakashit hua…………

Description about eBook : ‘Shabar Mantra’ has been prevalent throughout the country since ancient times, but neither was the effort of any institution to do it properly nor did anybody give attention to doing proper research on them. The first initiative, ‘Kalyan Mandir Publications’, made an effort towards this and the first part of the ‘collection’ presented as ‘Kaul-Kalpataru Chandi’ was published on March 16, 1991 and the second part was published on January 15, 1992……………….

“मुझे ऐसे मित्र की आवश्यकता नहीं जो मेरे साथ-साथ बदले और मेरी हां में हां भरे; ऐसा तो मेरी परछाई कहीं बेहतर कर लेती है।” ‐ प्लूटार्क
“I don’t need a friend who changes when I change and who nods when I nod; my shadow does that much better.” ‐ Plutarch

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