शाबर मन्त्र संग्रह भाग-10 : ऋतशील शर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – तन्त्र मन्त्र | Shabar Mantra Sangrah Part-10 : by Ritusheel Sharma Hindi PDF Book – Tantra Mantra

Book Nameशाबर मन्त्र संग्रह भाग-10 / Shabar Mantra Sangrah Part-10
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Pages 162
Quality Good
Size 23 MB
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पुस्तक का विवरण : ‘शाबर-मन्त्र-संग्रह’ प्रकाशित करने का हमारा मुख्य उद्धेश्य यह था कि ‘शाबर-मन्त्र-विद्या’ पर शोधात्मक एवं प्रमाणिक साहित्य जिज्ञासुओं को उपलब्ध हो| हमारे लिए यह अत्यन्त संतोष की बात है कि आज ‘शाबर-मन्त्र-संग्रह’ का नवां भाग प्रकाशित हो रहा है……….

Pustak Ka Vivaran : ‘Shabar-Mantra-Sangrah’ prakashit karne ka hamara mukhya uddheshya yah tha ki ‘Shabar-Mantra-Vidya’ par shodhatmak evam pramanik sahitya jigyasuon ko uplabdh ho. Hamare lie yah atyant santosh ki bat hai ki aj ‘Shabar-Mantra-Sangrah’ ka dashwa bhag prakashit ho raha hai………..

Description about eBook : Our main objective of publishing ‘Shabar-mantra-sangraha’ was that research and authentic literature on ‘Shabar-mantra-vidya’ should be available to the curious. It is a matter of great satisfaction for us that the tenth part of ‘Shabar-mantra-sangraha’ is being published today…………..

“प्यार कभी निष्फल नहीं होता; चरित्र कभी नहीं हारता; और धैर्य और दृढ़ता से सपने अवश्य सच हो जाते हैं।” ‐ पीट मेराविच
“Love never fails; Character never quits; and with patience and persistence; Dreams do come true.” ‐ Pete Maravich

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1 thought on “शाबर मन्त्र संग्रह भाग-10 : ऋतशील शर्मा द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – तन्त्र मन्त्र | Shabar Mantra Sangrah Part-10 : by Ritusheel Sharma Hindi PDF Book – Tantra Mantra”

  1. महोदय रितु सुशील शर्मा जी शाबर मंत्र संग्रह नामक पुस्तक आपने नहीं लिखी है आपके पिता स्वर्गीय श्री रामा दत्त शुक्ला द्वारा देशभर के चंडी के पाठकों द्वारा भेजी गई अनुभूति थी पूरे देश से तमाम प्रकार के साबर मंत्रों को आपके पिता ने संकलित करके 11 या 12 भागों में प्रकाशित किया था जिसको चौखंबा प्रकाशन के कोई खंडेलवाल ने शाबर मंत्र संग्रह नाम से उन्हीं मंत्रों का संकलन करके बेचना प्रारंभ कर दिया है महोदय आप की पुस्तकें बहुत ही ज्यादा शुद्ध प्रमाणित या यूं कहो देव श्रेणी की थी और मैं चाहता हूं किसका व्यापारी करण ना करें
    कल्याण मंदिर प्रकाशन कभी भी अर्थ के लिए काम नहीं किया है और आपसे अनुरोध है कि आप भी ऐसा ना करें आगे आपकी इच्छा

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