सूर्य का स्वागत : दुष्यन्त कुमार त्यागी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – कविता | Sury Ka Swagat : by Dushyant Kumar Tyagi Hindi PDF Book – Poem (Kavita)

सूर्य का स्वागत : दुष्यन्त कुमार त्यागी द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कविता | Sury Ka Swagat : by Dushyant Kumar Tyagi Hindi PDF Book - Poem (Kavita)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name सूर्य का स्वागत / Sury Ka Swagat
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 83
Quality Good
Size 2.40 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : मेरी प्रगति या अगति का यह मापदंड बदलो तुम, जुए के पत्ते सा मैं अभी अनिश्चित हूँ। मुझ पर हर और से चोटें पद रही है, मैं नया बनने के लिए खरीद पर चढ़ रहा हूँ। लड़ता हुआ नई राह गढ़ता हुआ आगे बढ़ रहा हूँ। अगर इस लड़ाई में मेरी सांसे उखड़ गई, मेरे बाजू टूट गए, चरणों में अधियाँ के समूह ठहर गए, मेरे अंधेरों पर तरंगकुल संगीत जम गया……

Pustak Ka Vivaran : Meree pragati ya agati ka yah mapadand badalo tum, juye ke patte sa main abhee anishchit hoon. Mujh par har aur se choten pad rahee hai, main naya banane ke liye khareed par chadh raha hoon. Ladata huya nayi raah gadhata huya aage badh raha hoon. Agar is ladayi mein meree sanse ukhad gayi, mere bajoo toot gaye, charanon mein adhiyan ke samooh thahar gaye, mere andheron par tarangakul sangeet jam gaya…………

Description about eBook : Change this criterion of my progress or progress, you are uncertain as of gambling. I am hurt by everyone else, I am climbing on buying to become new. I am moving ahead by forging a new path while fighting. If I lost my breath in this battle, my arms were broken, the groups of Adhiyas stopped at the feet, the waveful music froze on my darkness………..

“परस्पर आदान-प्रदान के बिना समाज में जीवन का निर्वाह संभव नहीं है।” ‐ सेमुअल जॉन्सन
“Life cannot subsist in a society but by reciprocal concessions.” ‐ Samuel Johnson

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