थिरके पत्ता पीपल का : डॉ. ओमप्रकाश गुप्त द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – साहित्य | Thirke Patta Pipal Ka : by Dr. Om Prakash Gupt Hindi PDF Book – Literature (Sahitya)

थिरके पत्ता पीपल का : डॉ. ओमप्रकाश गुप्त द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - साहित्य | Thirke Patta Pipal Ka : by Dr. Om Prakash Gupt Hindi PDF Book - Literature (Sahitya)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name थिरके पत्ता पीपल का / Thirke Patta Pipal Ka
Author
Category, , ,
Language
Pages 162
Quality Good
Size 46 MB
Download Status Available

थिरके पत्ता पीपल का का संछिप्त विवरण : मैं यह कह सकता हूं कि छन्द और भाव अ्रपरिवर्तित रखने का मैंने भरसकर प्रयत्न किया है। जहां कहीं थोड़ा – बहुत परिवर्तन हुआ है या छन्द टूटा है, वहां मैंने अपने आपको मजबूर पाया है। गीतों के हिन्दी रूपों में कतिपय डोगरी-प्रयोग समाविष्ट करने का लोभ भी मैं छोड़ नहीं पाया हूं। ‘न’ और ‘ना” जैसे प्रयोगों में मात्रा-लाभ के लिए मैंने अपने आप को स्वतंत्र मान लिया । इसी…..

Thirke Patta Pipal Ka PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Main yah kah sakta hoon ki chhand aur bhav Araparivartit rakhane ka mainne bharasakar prayatn kiya hai. Jahan kaheen thoda – bahut parivartan huya hai ya chhand toota hai, vahan mainne apne aapako majboor paya hai. Geeton ke hindi roopon mein katipay dogari-prayog samavisht karne ka lobh bhi main chhod nahin paya hoon. Na aur Na” jaise prayogon mein matra-labh ke liye mainne apane aap ko svatantra man liya. Isi…..
Short Description of Thirke Patta Pipal Ka PDF Book : I can say that I have tried my best to keep the verses and sentiments unchanged. Wherever there has been little change or the verse is broken, I have found myself compelled. I have not been able to give up the temptation to include some Dogri-experiments in the Hindi forms of songs. I considered myself independent for quantity-gain in experiments like ‘no’ and ‘na’. This…..
“आप जिस कार्य को कर रहे हैं उस पर पूरे मनोयोग से ध्यान केंद्रित करें। सूर्य की किरणों से उस समय तक अग्नि प्रज्जवलित नहीं होती है जब तक उन्हें केन्द्रित नहीं किया जाता है।” – अलेक्जेंडर ग्राहम बैल
“Concentrate all your thoughts upon the work at hand. The sun’s rays do not burn until brought to a focus.” – Alexander Graham Bell

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