विप्रदास : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – नाटक | Vipradas : Hindi PDF Book – Drama (Natak)

Book Nameविप्रदास / Vipradas
Author
Category, , ,
Language
Pages 230
Quality Good
Size 9 MB
Download Status Available

विप्रदास का संछिप्त विवरण : वह स्वभाव से शांत प्रकृति का आदमी है, और अपने बड़े भाई का अत्यन्त सम्मान करले के कारण शायद और किसी प्रसंग में वह चुप ही रहता; किन्तु जिस बात को लेकर उन्होंते ताला मारा उसका सहला कठिल था। फिर भी मृदुकंठ ही उसले कहा – भाई साहब, बनावटी दातों से जितला हो सकता है उससे ज्यादा नहीं होते का…….

Vipradas PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Vah Svabhav se Shant Prakrti ka Adami hai, aur Apane bade bhai ka Atyant Samman karane ke karan shayad aur kisi prasang mein vah chup hi rahata; Kintu jis bat ko Lekar Unhonne Tana Mara usaka sahana kathin tha. Phir bhee Mrdukanth hi usane kaha – bhai sahab, banavati daton se jitana ho sakata hai usase jyada nahin hone ka………….
Short Description of Vipradas PDF Book : He is a man of a quiet nature by nature, and he may have remained silent in any other context, perhaps due to his great respect for his elder brother; But what he taunted about was hard to bear. Still, Mridukanth only said – Brother, not to be more than what you can with artificial teeth …………
“हर सुबह जब आप जागते हैं तो अपने भगवान को धन्यवाद दें तथा आप अनुभव करते है कि आपने वह कार्य करना है जिसे अवश्य किया जाना चाहिए, चाहे आप इसे पसंद करें या नहीं। इससे चरित्र का निर्माण होता है।” ‐ एमरसन
“Thank God every morning you get up and find you have something to do that must be done, whether you like it or not. That builds character.” ‐ Emerson

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