विवेकानन्द साहित्य सप्तम खण्ड / Vivekanand Sahitya Saptam Khand

विवेकानन्द साहित्य सप्तम खण्ड - - साहित्य | Vivekanand Sahitya Saptam Khand : Hindi PDF Book - Literature (Sahitya)
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विवेकानन्द साहित्य सप्तम खण्ड पुस्तक का कुछ अंशसंसार में सर्वदा दाता का आसन ग्रहण करो। सबंस्व दे दो, पर बदले में कुछ न चाहो। प्रेम दो, सहायता दो, सेवा दो; इनमें से जो तुम्हारे पास देने के लिए है, वह दे डालो; किन्तु सावधान रहो, उनके बदले में कुछ लेने की इच्छा कभी न करो। किसी तरह की कोई शर्त मत रखो। ऐसा करने पर तुम्हारे लिए भी कोई किसी तरह की शर्त नहीं रखेगा। अपनी हादिक दानशीलता के कारण ही हम देते चलें—ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार ईश्वर हमें देता है…………

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name विवेकानन्द साहित्य सप्तम खण्ड / Vivekanand Sahitya Saptam Khand
Author
CategoryReligious Books in Hindi PDF ज्ञान / Knowledge Hindi Books History Book in Hindi Philosophy Book in Hindi
Language
Pages 432
Quality Good
Size 195 MB
Download Status Available
“एक गुस्सैल व्यक्ति अपना मुंह खोलता है, लेकिन अपनी आंखे (सोचने की शक्ति को) बन्द कर लेता है।” ‐ कैटो
“An angry man opens his mouth and shuts his eyes.” ‐ Cato

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