वृहद इन्द्रजाल : श्री पं० श्रीमणि शुक्ल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – तंत्र मंत्र | Vrahad Indrajal : by Shri Pt. Shri Mani Shukla Hindi PDF Book – Tantra Mantra

वृहद इन्द्रजाल : श्री पं० श्रीमणि शुक्ल द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - तंत्र मंत्र | Vrahad Indrajal : by Shri Pt. Shri Mani Shukla Hindi PDF Book - Tantra Mantra
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name वृहद इन्द्रजाल / Vrahad Indrajal
Author
Category, ,
Language
Pages 412
Quality Good
Size 45.8 MB
Download Status Available
 चेतावनी– यह पुस्तक केवल शोध कार्य के लिए है| इस पुस्तक से होने वाले परिणाम के लिए आप स्वयं उत्तरदायी होंगे न कि 44Books.com

पुस्तक का विवरण : तंत्र मंत्र अपने कार्य की सिद्धि के लिए है, न कि उनसे अनुचित लाभ उठाया जावे। पुस्तक में बहुत से उपयोगी तंत्र मन्त्र दिए गए है फिर भी हमारी उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिस प्रकार कुआँ या तालाब जल पीने के लिए होता है न कि उसमे डूबे का आत्महत्या की जावे या उससे किसी का अनिष्ट किया जावे। यह पुस्तक सर्व जन के कल्याण के लिए प्रकाशित की गई है फिर भी………..

Pustak Ka Vivaran : Tantra Mantra apane kary ki siddhi ke liye hai, na ki unase anuchit labh uthaya jave. Pustak mein bahut se upayogi tantra mantra diye gaye hai phir bhee hamari usaki koi jimmedari nahin hai. Jis Prakar kuan ya talab jal peene ke liye hota hai na ki usame doobe ka aatmahatya kee jave ya usase kisi ka anisht kiya jave. Yah Pustak sarv jan ke kalyan ke liye prakashit ki gayi hai phir bhi.…………

Description about eBook : The Tantra mantra is for the accomplishment of its work, not to be unfairly taken advantage of. Many useful tantra mantras have been given in the book, yet we have no responsibility for it. Just as a well or pond is meant for drinking water, not to be immersed in it, or to be disrespected. This book has been published for the welfare of all the people………………..

“आप प्रत्येक ऐसे अनुभव जिसमें आपको वस्तुत डर सामने दिखाई देता है, से बल, साहस तथा विश्वास अर्जित करते हैं। आपको ऐसे कार्य अवश्य करने चाहिए जिनके बारे में आप सोचते हैं कि आप उनको नहीं कर सकते हैं।” ‐ एलेनोर रुज़वेल्ट
“You gain strength, courage, and confidence by every experience in which you really stop to look fear in the face. You must do the thing which you think you cannot do.” ‐ Eleanor Roosevelt

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