पारो की कहानी : सुघरा मेहदी | Paro Ki Kahani : By Sughra Mehadi Hindi Book

पारो की कहानी : सुघरा मेहदी | Paro Ki Kahani : By Sughra Mehadi Hindi Book
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पुस्तक के कुछ अंश :  पारो का मन घर के कामों में नहीं लगता था। उसे अच्छा लगता था बाहर घूमना, खेतों पर जाना और खूब तेज़ साइकिल दौड़ाना ! एक बहादुर लड़की की कहानी, जिसे ज़िन्दगी में कुछ ऐसा करना था जिसमें उसे खुशी मिले ! सर्वश्रेष्ठ कथामाला भारत के महान लेखकों की एक शानदार कहानी श्रृंखला है। आइए अपने देश के साहित्य का खजाना खोजें, इन कहानियों और इनसे जुड़े खेलों और अभ्यासों के ज़रिये ! इस पुस्तक की कहानी उर्दू भाषा की सुगरा मेहदी ने लिखी है।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name पारो की कहानी | Paro Ki Kahani
Author
CategoryStory Book PDF in Hindi
Language
Pages 24
Quality Good
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“अगर एक व्यक्ति को मालूम ही नहीं कि उसे किस बंदरगाह की ओर जाना है, तो हवा की हर दिशा उसे अपने विरुद्ध ही प्रतीत होगी।” सेनेका
“If a man does not know to which port he is steering, no wind is favourable to him.” Seneca

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