ब्रह्मपुत्र के आसपास : लील बहादुर क्षेत्री | Brahmaputra Ke Aasapas : By Leel Bahadur Kshetri Hindi Book
पुस्तक के कुछ अंश : नेपाली साहित्य में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए भानुभक्त पुरस्कार से सम्मानित श्री लील बहादुर क्षेत्री (जन्म 1933) भारतीय नेपाली पाठकों के लिए प्रिय और सुपरिचित लेखक रहे हैं। असम के नेपालियों के बीच अपनी साहित्यिक कृतियों के कारण इनकी विशिष्ट पहचान है। ब्रह्मपुत्र के आसपास असम में बसे लाखों नेपालियों के पुनस्थापन एवं जीविकोपार्जन की एक मार्मिक संघर्ष गाथा है। विशिष्ट कथ्य, पैनी एवं सतर्क दृष्टि, सांस्कृतिक अस्मिता, जातीय गौरव और सौहार्द्र के प्रामाणिक अंकन तथा अकृत्रिम शिल्प के नाते वर्ष 1987 में नेपाली में लिखित श्रेष्ठ कृति के रूप में इसे साहित्य अकादेमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ। जीविका से अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण श्री क्षेत्री ने आम नेपाली एवं असमी लोगों के जीवन को बहुत नजदीक से देखा-परखा है। वे उनके हर्ष-विषाद, शान्ति-संघर्ष, स्वार्थ- परमार्थ के साक्षी ही नहीं, उनके अधिकारों के प्रवक्ता भी रहे हैं।
इस कृति का सरल एवं सुललित अनुवाद डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद साह ने किया है। हिन्दी और नेपाली भाषा के सुपरिचित विद्वान डॉ. साह की कई कृतियाँ प्रकाशित हैं। हिन्दी में अजगर और सतह के नीचे इनके दो प्रकाशित कथा-संग्रह हैं।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | ब्रह्मपुत्र के आसपास | Brahmaputra Ke Aasapas |
| Author | Leel Bahadur Kshetri |
| Category | संस्कृति | Culture Hindi Books |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 182 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“हमारा कर्तव्य है कि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखें। अन्यथा हम अपने मन को सक्षम और शुद्ध नहीं रख पाएंगे।” ‐ बुद्ध
“To keep the body in good health is a duty… otherwise we shall not be able to keep our mind strong and clear.” ‐ Buddha
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