कहि ईसुरी फाग : मैत्रेयी पुष्पा | Kahi Isuri Phag : By Maitreyi Pushpa Hindi Book
कहि ईसुरी फाग पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : प्रमाणित किया जाता है कि कुमारी ऋतु के काव्य में नारी संकेतना’ शीर्षक से सो हिन्दी विष पी-एम.डी. की उपाधि हेतु मेरे एवं निरीक्षण में निष्पादित एवं पूर्ण दिया है। शोधार्थी ने दो सी दिवस से अधिक की उपस्थितियों दर्ज कराई है। मेरी जानकारी एवं विश्वास प्रस्ता स्वयंका है। का होता है विषय क्यन की दृष्टि से भी यह कार्य गम्भीर अध्ययन विश्लेषण करता है, तो जात करता तथा ज्ञात को दृष्टि के आलोक में विश्लेषित करना परन्तु इस शोध को लेकर मेरी कुछ आपत्तियाँ है क्योंकि प विद्यालय की शोध-उपाधि के लिए अध्यादेश की आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं करता। शोधग्रन्थ के नियमों के लिए कुछ लिखित प्रमाणआवश्यक होते हैं, जैसे कानों द्वारा लिखे गए उद्धरण इतिहासों से लिये गए प्रमाण पत्र-पत्रिकाओं में दिए गए मंतव्य ऐसे हो से निष्कर्षो को पुष्ट किया जाता है। अन्य पांडित्यपूर्ण नेपणाएँ जो शोध का आधार हो सकती हैं, इ शोध-प्रबन्ध में नहीं है। फिर संदर्भ नोट और संदर्भसूची बनाने की भी जरूरत महसूस नहीं हुई।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | कहि ईसुरी फाग | Kahi Isuri Phag |
| Category | Novel in Hindi PDF Book |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 348 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“अच्छे विचारों को स्वतः ही नहीं अपनाया जाता है। उन्हें पराक्रमयुक्त धैर्य के साथ व्यवहार में लाया जाना चाहिए।” ‐ हायमैन रिकओवर
“Good ideas are not adopted automatically. They must be driven into practice with courageous patience.” ‐ Hyman Rickover
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