अनोखेलाल : डॉ. सरोजिनी प्रीतम | Anokhelal : By Dr. Sarojini Pritam Hindi Book

अनोखेलाल : डॉ. सरोजिनी प्रीतम | Anokhelal : By Dr. Sarojini Pritam Hindi Book
PDF डाउनलोड करने के लिए लिंक नीचे दिया गया है

अनोखेलाल पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : अनोखेलाल का कहना था फिल्मों में मरना उतना आसान नहीं, जितना वास्तविक जीवन में। जीवन में एक बार मर जाइये तो हमेशा की छुट्टी हो जाती है। न बार-बार अर्जी देनी पड़ेगी, न ही कोई छुट्टी सैक्शन का चक्कर मर गये तो सारी छुट्टियों के हिसाब-किताब जीने वाले अपने आप करते रहेंगे। सारी चिन्ता-फिक छोड़कर आराम से मरिये, मज़े से मरिये बेखटके मरिये चैन की बंसी बजाइए। अपनी प्यारी राधा को बुलाइए। असली मरना भी क्या मरना है, शोक सभाएं जुटें… शोक प्रस्ताव हो। यहां तो मारने वाला, पैदा करने वाला है लेखका उसके मरने की मुद्रा बताने वाला है निर्देशका प्रस्ताव पास होने के बाद छोड़ो एक-एक लाइन लिखकर देने वाला है। लेखक-निर्देशक। अभी अनोखे पूरी तरह से सम्भल भी न पाया था कि मरने के दृश्य की फिर से नौबत आ गई। निर्देशक बोला, “अब तुम धड़ाम से गिर जाओ।”

Another short Hindi story is waiting for you

पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name अनोखेलाल | Anokhelal
Author
CategoryComedy Books in Hindi Entertainment Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi
Language
Pages 174
Quality Good
Download Status Not for Download
“जब मैं चौदह साल का लड़का था, तब मेरे पिता इतने अज्ञानी थे कि मुझे उनका आसपास होना बिल्कुल नहीं पसंद था। लेकिन जब मैं इक्कीस का हुआ, तो मुझे बेहद आश्चर्य हुआ कि सात वर्षों में उन्होंने कितना कुछ सीख डाला था।” ‐ मार्क ट्वैन
“When I was a boy of fourteen, my father was so ignorant I could hardly stand to have the old man around. But when I got to be twenty-one, I was astonished at how much the old man had learned in seven years.” ‐ Mark Twain

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

Leave a Comment