Hindu Dharma Ke Solaha Sanskar : By Sachchidanand Shukla Hindi Book | हिंदू धर्म के सोलह संस्कार : सच्चिदानंद शुक्ला द्वारा हिंदी पुस्तक
हिंदू धर्म के सोलह संस्कार पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : ‘संस्कार’ या ‘संस्कृति’ शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है— मनुष्य का वह कर्म, जो अलंकृत और सुसज्जित हो। प्रकारांतर से संस्कृति शब्द का अर्थ है- धर्म संस्कृति और संस्कार में कोई अंतर नहीं है। दोनों का एक ही अर्थ है, मात्र ‘इकार’ की मात्रा का अंतर है। हिंदू धर्म में मुख्य रूप से सोलह संस्कार हैं, जो संस्कार मनुष्य की जाति और अवस्था के अनुसार किए जानेवाले धर्म कार्यों की प्रतिष्ठा करते हैं।
हिंदू धर्म दर्शन की संस्कृति यज्ञमय है, क्योंकि सृष्टि ही यज्ञ का परिणाम है, उसका अंत (मनुष्य की अंत्येष्टि) भी यज्ञमय है (शव को चितारूपी हवन कुंड में आहुति के रूप में हवन करना) । इस यज्ञमय क्रिया (संस्कार) में गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि क्रिया तक सभी कृत्य (संस्कार) यज्ञमय संस्कार के रूप में जाने और माने
जाते हैं।
| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | Hindu Dharma Ke Solaha Sanskar | हिंदू धर्म के सोलह संस्कार |
| Author | Sachchidanand Shukla |
| Category | हिन्दू / Hinduism Hindi Books Bhartiya Sanskriti In Hindi Books |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 136 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“पिता एक प्रकाश-स्तम्भ की तरह होते है। जब धुंध होती है तो बच्चे प्रकाश के लिए हमेशा उन पर निर्भर रह सकते हैं।” – क्रिस्टी बोरजेल्ड
“Fathers are like a lighthouse… when there is fog his children can always depend on seeing the light.” – Christy Borgeld
हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें












