क्रांति कक्का की जन्म-शताब्दी : रवीन्द्र वर्मा | Kranti Kakka ki Janma-Satabdi : By Ravindra Verma Hindi Book
क्रांति कक्का की जन्म-शताब्दी पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : यह उपन्यास जिस समय में अनति है, वह 1553 की पेड़ सीवी जयन्ती के आस-पास है। इसी समय क्रान्ति कक्का की शादी भी है। युवा का झाँसी में चन्द्रशेखर आज़ाद के शान्ति के क्वार्टर के सदस्य जब आज़ाद के बाद इस शहर में कुछ बरस भूमिगत रहे। शिक्षक कक्का रिटायर होकर अपने दूर के के साथ आ गए थे घोसी का यह ध्वनीय पर इस मंजीकृत समय में बनाओं का केन्द्र बन जाता है इसके एक तोर पर क्रान्ति कक्का है जिनकी स्मृति में अपने क्रान्तिकारी दल केनोंकी यह है कि कौन पहले देश पर कुचन होगा, दूसरे छोर पर कर का प्यारा पोता है जिसके दिल्ली के पास स्थित पानी के कारखाने की बोतलों पर आँसी की रानी की तस्वीर है इस तस्वीर में पोड़े पर बैठी रानी का चेहरा अभिनेत्री रानीका में का का दूसरा है इसी दिल्ली में ही अपनी नौकरी खो देता है क्योंकि पुरानी पड़े जमीन पर की मिल में काम करता है वह सोने के भाव वि इसी बेकार बाप का इकलौता पुत्र अमरीका हो जाता है: खड़ा हो सके।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | क्रांति कक्का की जन्म-शताब्दी | Kranti Kakka ki Janma-Satabdi |
| Author | रविन्द्र वर्मा / Ravindra Verma |
| Category | Kahani Kahaniyan Book in Hindi PDF Novel Book in Hindi PDF Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 200 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“सफलता का एक ही सूत्र है और वह जब अन्य हिम्मत हार चुके हों तो भी आप डटे रहते हैं।” ‐ विलियम फैदर
“Success seems to be largely a matter of hanging on after others have let go.” ‐ William Feather
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