धृतकुमारी (ग्वार पाठा) : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – सामाजिक | Dhratkumari (Gvar Patha) : Hindi PDF Book – Social (Samajik)

धृतकुमारी (ग्वार पाठा) : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - सामाजिक | Dhratkumari (Gvar Patha) : Hindi PDF Book - Social (Samajik)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name धृतकुमारी (ग्वार पाठा) / Dhratkumari (Gvar Patha)
Author
Category, ,
Language
Pages 6
Quality Good
Size 2.4 MB
Download Status Available

धृतकुमारी (ग्वार पाठा) का संछिप्त विवरण : यह लिलीएसी कूल का बहुवर्षीय मासल पौधा है जिसकी ऊचांई 2-3 फुट तक होती है। इसका तना बहुत छोटा तथा जड़े भी झकड़ा होती है जो कि जमीन के अन्दर कुछ ही गहराई तक रहती है। मूल के ऊपर से काण्ड से पत्ते निकलते है। ये काण्ड को चारो ओर से घेरे रहते है। निकास के स्थान पर वर्ण श्वेत होता है जो धीरे-धीरे हरा हो जाता है……….

Dhratkumari (Gvar Patha) PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Yah lilesi kool ka bahuvarshiy masal paudha hai jisaki oochani 2-3 phut tak hoti hai. isaka tana bahut chhota tatha jade bhi jhakada hoti hai jo ki jamin ke andar kuchh hi gaharai tak rahati hai. mool ke oopar se kand se patte nikalate hai. ye kand ko charo or se ghere rahate hai. nikas ke sthan par varn shvet hota hai jo dheere-dheere hara ho jata hai……
Short Description of Dhratkumari (Gvar Patha) PDF Book : It is a multi-year old moss plant of Lilyaceae Cool, which is up to 2-3 feet in height. Its trunk is very small and it is also jagged, which remains to some depth inside the ground. Leaves emerge from the scab above the root. These circles surround the scandal. At the exit, the color is white, which gradually turns green…….
“एक मूल नियम है कि समान विचारधारा के व्यक्ति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। नकारात्मक सोच सुनिश्चित रुप से नकारात्मक परिणामो को आकर्षित करती है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति आशा और विश्वास के साथ सोचने को आदत ही बना लेता है तो उसकी सकारात्मक सोच से सृजनात्मक शक्तियों सक्रिय हो जाती हैं- और सफलता उससे दूर जाने की बजाय उसी ओर चलने लगती है” ‐ नार्मन विंसेन्ट पीएले
“There is a basic law that like attracts like. Negative thinking definitely attracts negative results. Conversely, if a person habitually thinks optimistically and hopefully, his positive thinking sets in motion creative forces — and success instead of eluding him flows toward him.” ‐ Norman Vincent Peale

हमारे टेलीग्राम चैनल से यहाँ क्लिक करके जुड़ें

Check Competition Books in Hindi & English - कम्पटीशन तैयारी से सम्बंधित किताबें यहाँ क्लिक करके देखें

Leave a Comment