दीवाना 15 अप्रैल 1982 : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – पत्रिका | Diwana 15 April 1982 : Hindi PDF Book – Magazine (Patrika)

दीवाना 15 अप्रैल 1982 : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - पत्रिका | Diwana 15 April 1982 : Hindi PDF Book - Magazine (Patrika)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name दीवाना 15 अप्रैल 1982 / Diwana 15 April 1982
Author
Category, , , ,
Language
Pages 44
Quality Good
Size 8.3 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : तारीफ करते-करते ही थक गया हूं | हर नए अंक को पढ़ कर ही सांस लेता हूं। इस पत्रिका में बच्चों के लिए जितना साजसामान है, युवा वर्ग के लिए भी उतना ही साज सामानहै। जो भी दीवाना पढ़े इसका दीवाना हो कर रह जाए। आजकल के इस महंगाई के जमाने में भी इतने कम पैसे में. इतना सारा सामान……

Pustak Ka Vivaran : Tariph karte-karte hi thak gaya hoon. Har Naye ank ko padh kar hi sans leta hoon. Is Patrika mein Bachchon ke liye jitana Sajsaman hai, yuva varg ke liye bhi utana hi saj Samanahai. Jo bhi deevana padhe isaka deevana ho kar rah jaye. Aajkal ke is Mahangai ke jamane mein bhi itane kam paise mein. Itana sara saman……..

Description about eBook : I am tired of praising. I take a breath reading every new issue. There is as much equipment for the children in this magazine as there is for the youth group as well. Anyone who reads Deewana should be crazy about it. In today’s time of inflation, even in so little money. So much stuff……

“यदि बार-बार असफल नहीं हो रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप कुछ आविष्कारक काम भी नहीं कर रहे हैं।” वुडी एल्लेन
“If you’re not failing every now and again, it’s a sign you’re not doing anything very innovative.” Woody Allen

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