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गोचर का प्रसाद बांटता लापोड़िया / Gochar Ka Prasad Bantata Lapodiya

गोचर का प्रसाद बांटता लापोड़िया : हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - पत्रिका | Gochar Ka Prasad Bantata Lapodiya : Hindi PDF Book - Magazine (Patrika)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name गोचर का प्रसाद बांटता लापोड़िया / Gochar Ka Prasad Bantata Lapodiya
Author
Category, , ,
Language
Pages 34
Quality Good
Size 20 MB
Download Status Available

गोचर का प्रसाद बांटता लापोड़िया का संछिप्त विवरण : लेकिन आज लापोड़िया का माथा फिर ऊंचा हुआ है । अपनी जड़ों की पहचानने, उनको तलाशने की यह यात्रा बहुत लंबी रही है । लेकिन प्रकृति में कोई भी काम बिना धीरज के फल नहीं देता है । बहुत पहले लापोड़िया गांव टूट चुका था उसके खेत उजड़ गये थे, उसका गोचर सूख गया था । गोचर पर यहाँ वहा कब्जे हो चले थे और उसके दो पुराने तालाब भी पाल टूटने के कारण नष्ट हो गये थे…….

Gochar Ka Prasad Bantata Lapodiya PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Lekin Aaj Lapodiya ka Matha phir Uncha huya hai . Apani jadon ki pahachanane, unako Talashane ki yah yatra bahut lambi rahi hai . Lekin prakrti mein koi bhee kam bina dheeraj ke phal nahin deta hai . Bahut pahale lapodiya Ganv toot chuka tha usake khet ujad gaye the, usaka Gochar sookh gaya tha . Gochar par yahan vaha kabje ho chale the aur usake do Purane Talab bhi pal Tootane ke karan Nasht ho gaye the……
Short Description of Gochar Ka Prasad Bantata Lapodiya PDF Book : But today Lapodia’s forehead has risen again. This journey of identifying their roots, searching for them has been very long. But no work in nature gives fruit without endurance. Before long, the village of Lapodia was broken, its fields were destroyed, its transit dried up. The transit was captured here and its two old ponds were also destroyed due to sails breaking ……
“मृत्यु के डर के निवारण का शायद सर्वोत्तम उपाय इस बात पर विचार करने में है कि जीवन की एक शुरुआत होती है और एक अंत होता है। एक समय था जब आप नहीं थे: उससे हमे कोई मतलब नहीं होता। तो फिर हमें क्यों तकलीफ होती है कि ऐसा समय आएगा जब हम नहीं होंगे? मृत्यु के बाद सब कुछ वैसा ही होता है जैसा हमारे जन्म से पहले था।” विलियम हज़्लिट्ट
“Perhaps the best cure for the fear of death is to reflect that life has a beginning as well as an end. There was a time when you were not: that gives us no concern. Why then should it trouble us that a time will come when we shall cease to be? To die is only to be as we were before we were born.” William Hazlitt

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