मैं लाजपत राय बोल रहा हूँ : गिरिराज शरण द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – जीवनी | Mai Lajpat Rai Bol Raha Hun : by Giriraj Sharan Hindi PDF Book – Biography (Jeevani)

मैं लाजपत राय बोल रहा हूँ : गिरिराज शरण द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - जीवनी | Mai Lajpat Rai Bol Raha Hun : by Giriraj Sharan Hindi PDF Book - Biography (Jeevani)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name मैं लाजपत राय बोल रहा हूँ / Mai Lajpat Rai Bol Raha Hun
Author
Category, , , ,
Language
Pages 167
Quality Good
Size 1.4 MB
Download Status Available

पुस्तक का विवरण : लालाजी राष्ट्रीय विचारों के प्रणेता थे। उनके लिए पूर्ण स्वराज्य आदर्श भी था और धर्म भी। अपने आदर्श की पूर्ति के लिए उन्होंने प्रार्थना-पत्रों की राजनीति को सदा के लिए मुक्ति दे दी थी। उन्होंने जिस स्वराज्य की कल्पना की थी, वह ब्रिटिश शासन में रहकर संभव नहीं था। वे पृथक्‌ एवं स्वतंत्र राज्य के समर्थक थे, जिसके प्रत्येक कार्य को उसके नागरिक स्वयं संपन्न…..

Pustak Ka Vivaran : Lala Ji Rashtriya Vicharon ke praneta the. Unke liye purn svarajy Aadarsh bhi tha aur dharm bhi. Apne Aadarsh ki purti ke liye unhonne prarthana-Patron ki Rajneeti ko sada ke liye mukti de di thi. Unhonne jis Svarajy ki kalpana ki thi, vah British shasan mein rahkar Sambhav nahin tha. Ve prthak‌ evan svatantra Rajy ke Samarthak the, Jiske pratyek kary ko uske Nagrik svayan Sampann……….

Description about eBook : Lalaji was the pioneer of national thought. For him, Purna Swaraj was the ideal as well as religion. For the fulfillment of his ideal, he had given freedom to the politics of petitions forever. The Swarajya he had envisioned was not possible under British rule. He was a supporter of a separate and independent state, every function of which was performed by its citizens……..

“प्यार एक ऐसा खेल है जिसे दो व्यक्ति खेल सकते हैं और जिसमें दोनों ही जीतते हैं।” ‐ इवा गाबोर
“Love is a game that two can play and both win.” ‐ Eva Gabor

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