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माटी खाईं जनावरा / Mati Khai Janavara

माटी खाईं जनावरा : सर्वदानन्द द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक - कहानी | Mati Khai Janavara : by Sarvdanand Hindi PDF Book - Story (Kahani)
पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name माटी खाईं जनावरा / Mati Khai Janavara
Author
Category, , ,
Language
Pages 289
Quality Good
Size 166 KB
Download Status Available

सभी मित्र हस्तमैथुन के ऊपर इस जरूरी विडियो को देखे, ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में शेयर करें| भगवान नाम जप की शक्ति को पहचान कर उसे अपने जीवन का जरुरी हिस्सा बनाये|

पुस्तक का विविरण : वंदना के सीमान्त पर एक लाल रेखा है। वह रेखा श्रृंगार का साधन जब रही हो तब रही हो , आज उससे आगे बढ़कर वह एक प्रतीक बन गई है। वह केवल माथे को ही, कोमल-कलित कुंतलराशि को ही दो भागों में विभाजित नहीं करती। वह जिस नारी की मांग का श्रृंगार बनती है उसे इस संसार से……

Pustak Ka Vivaran : Vandana ke Seemant par ek lal rekha hai. Vah Rekha shrrngar ka sadhan jab rahi ho tab rahee ho , Aaj usase aage badhakar vah ek prateek ban gayi hai. Vah keval mathe ko hee, komal-kalit kuntalarashi ko hee do bhagon mein vibhajit nahin karati. Vah jis Nari kee mang ka shrrngar banati hai use is sansar se…………
Description about eBook : There is a red line on the border of Vandana. When that line has been the means of makeup, today, it has become a symbol by moving beyond it. It does not divide the forehead, the soft-colored quilt, into two parts. The woman whose demand is made up of this world………..
“महान कार्यों को पूरा करने के लिए न केवल हमें कार्य करना चाहिए बल्कि स्वप्न भी देखने चाहिए। न केवल योजना बनानी चाहिए, अपितु विश्वास भी करना चाहिए।” ‐ एनोटोले फ्रांस
“To accomplish great things, we must not only act but also dream. Not only plan but also believe.” ‐ Anatole France

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