मुकुट : नित्यानंद वात्स्यायन द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – नाटक | Mukut : by Nityanand Vatsayan Hindi PDF Book – Drama (Natak)

Book Nameमुकुट / Mukut
Author
Category, , , , ,
Language
Pages 114
Quality Good
Size 2 MB
Download Status Available

मुकुट का संछिप्त विवरण : कमला – चलत्रो मोहन ! राजा बने हैं तो राज करें अकेले। खेल ख़राब कर दिया तो समझते हैं बह्दुर बत गये। दूसरे की चीज छीलना ही जैसे बहादुरी है। (मोहन को प्राय खींचती हुई ले जाती है प्रकाश उन्हें जाते देखता है; फिर खड़ा हो जाता है मुकुट उतारा है ; कुछ देर बाद पत्थर को एक ठोकर मार कर उलट देता है…

Mukut PDF Pustak Ka Sankshipt Vivaran : Kamala – Chalo Mohan ! Raja bane hai to Raj karen Akele. Khel Kharab kar diya to Samajhate hain bahadur ban gaye. Doosare ki cheej chheenana hi jaise bahaduri hai. (Mohan ko Pray kheenchatin huyi le jati hai prakash unhen jate dekhata hai; Phir khada ho jata hai Mukut utara hai ; Kuchh der bad Patthar ko Ek Thokar mar kar ulat deta hai……..
Short Description of Mukut PDF Book : Kamala – Come on Mohan! If you become king then rule alone. If the game gets bad, they think they have become brave. To take away something else is like bravery. (Pulling Mohan often, Prakash sees him go; then he stands up and has taken off the crown; after a while, he reverses the stone with a stumble ……
“ग्राहक हमारे लिए एक विशिष्ट अतिथि है। वह हम पर निर्भर नहीं है। हम ग्राहक पर निर्भर हैं। वह हमारे कार्य में व्यवधान नहीं है – बल्कि वह इसका उद्देश्य है। हम ग्राहक की सेवा कर कोई उपकार नहीं कर रहे। वह सेवा का मौका देकर हम पर उपकार कर रहा है।” ‐ महात्मा गांधी
“A customer is the most important visitor on our premises. He is not dependent on us. We are dependent on him. He is not an interruption in our work – he is the purpose of it. We are not doing him a favour by serving him. He is doing us a favour by giving” ‐ Mahatma Gandhi

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