अष्टावक्र गीता | Ashtavakra Gita PDF
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अष्टावक्र गीता | Ashtavakra Gita PDF Hindi Book
अष्टावक्र गीता पुस्तक का कुछ अंश : एक समय में मिथिलाधीश राजा जनक के मन में पूर्व पुण्य के प्रभाव से इस प्रकार जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि असार संसार रूप के बंधन से किस प्रकार मुक्ति होगी फिर उन्होंने ऐसा भी विचार किया कि किसी जन्म ब्रह्मज्ञानी गुरु के समीप जाना चाहिए इसी अन्तर में उनको मानो ब्रह्मज्ञान के समुद्र परम दयालु श्री अष्टावक्र जी मिले। इनकी आकृति को देखकर राजा जनक के मन में यह अभिमान हुआ कि यह ब्राह्मण अत्यंत ही कुरूप है…..
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | अष्टावक्र गीता | Ashtavakra Gita PDF |
| Author | Unknown |
| Category | संस्कृति | Culture Hindi Books हिन्दू / Hinduism Hindi Books Geeta Book in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 180 |
| Quality | Good |
| Size | 54.3 MB |
| Download Status | Available |
“जो बीत गया है उसकी परवाह न करें, जो आने वाला है उसके स्वप्न न देखें, अपना ध्यान वर्तमान पर लगाएं।” ‐ बुद्ध
“Do not dwell in the past, do not dream of the future, concentrate the mind on the present moment.” ‐ Buddha
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