मुन्ना बैंडवाले उस्ताद : शिवदयाल | Munna Bandwale Ustad : By Shivdayal Hindi Book
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मुन्ना बैंडवाले उस्ताद पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : अवस्था मेरी बहुत हो गयी देह की एक-एक मांसपेशी झूल गयी है अपना काम खुद करने में असमर्थप्राय हो गया हूँ अब और नहीं जिया जाता लेकिन अब भी अगर जिन्दा हूँ तो सजा काटने के लिए ही न! मन पर गुनाहों का बोझ है जिसे मैं तुम्हारे साथ बाँट नहीं सकता क्योंकि तुमने ऐन मौके पर साथ छोड़ दिया मेरा, नहीं तो क्यों यह सब अकेले वहन करता, कुछ हलका तो होता पर नहीं विमल की माँ, तुम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती थीं तुम्हारी आँखों का तारा तुम्हारे सामने टूटकर बिखर जाए और तुम देख पातीं? यह सब तो मुझे ही झेलना था |
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| Book Name | मुन्ना बैंडवाले उस्ताद | Munna Bandwale Ustad |
| Author | शिवदयाल / Shivdayal |
| Category | कहानी संग्रह / Story Collections Fiction Book in Hindi PDF Kahani Sangrah Book in Hindi PDF Motivational Book in Hindi Self Help Book in Hindi Story Book PDF in Hindi |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Pages | 188 |
| Quality | Good |
| Download Status | Not for Download |
“परिवर्तन को जो ठुकरा देता है वह क्षय का निर्माता है। केवलमात्र मानव व्यवस्था जो प्रगति से विमुख है वह है कब्रगाह।” ‐ हैरल्ड विल्सन
“He who rejects change is the architect of decay. The only human institution which rejects progress is the cemetery.” ‐ Harold Wilson
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