Saral Shiv Puran Hindi Audiobook | सरल शिव पुराण
Saral Shiv Puran Hindi Audiobook का संक्षिप्त विवरण : पुराण प्राचीनतम धर्मग्रंथ होने के साथ-साथ ज्ञान, विवेक, बुद्धि और दिव्य प्रकाश के स्रोत भी हैं। इनमें हमें प्राचीन धर्म, चिंतन, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति और अन्य अनेक विषयों का विस्तृत विवेचन पढ़ने को मिलता है। इनमें ब्रह्मांड (सर्ग) की रचना, क्रमिक विनाश और पुनर्रचना (प्रतिसर्ग), अनेक युगों (मन्वंतर), सूर्य वंश और चंद्र वंश आदि के संपूर्ण इतिहास तथा उनकी वंशावली का विस्तृत वर्णन मिलता है।
पुराण समय के साथ बदलते जीवन की विभिन्न अवस्थाओं और पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये ऐसे प्रकाशगृह हैं, जो वैदिक सभ्यता और सनातन धर्म को प्रदीप्त करते हैं। ये हमारी जीवनशैली और विचारधारा पर भी महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
गागर में सागर भर देना एक अच्छे रचनाकार की पहचान होती है। किसी रचनाकार ने अठारह पुराणों के सार को एक ही श्लोक में व्यक्त कर दिया है—
“परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीड़नम्।
अष्टादश पुराणानि व्यासस्य वचनद्वयम्।।”
अर्थात्, व्यास मुनि ने अठारह पुराणों में मुख्यतः दो ही बातें कही हैं कि परोपकार करना संसार का सबसे बड़ा पुण्य है और किसी को पीड़ा पहुँचाना सबसे बड़ा पाप।
इसलिए किसी व्यक्ति को दुःख या पीड़ा पहुँचाने के बजाय मनुष्य को अपना जीवन परोपकार के मार्ग में लगाना चाहिए।
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इस पुस्तक के माध्यम से शिव पुराण को सरल और रोचक भाषा-शैली में प्रस्तुत किया गया है। अन्य धार्मिक ग्रंथों की भाँति इस धर्मग्रंथ में भी शिवजी की अनेक लीलाओं का वर्णन किया गया है। आशा है कि यह ग्रंथ पाठकों की कसौटी पर खरा उतरेगा और उन्हें शिव पुराण के संबंध में व्यापक ज्ञान प्रदान कर उनके भक्तिभाव में वृद्धि करेगा।
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| पुस्तक का विवरण / Book Details | |
| AudioBook Name | Saral Shiv Puran | सरल शिव पुराण |
| Author | Unknown |
| Category | Hindi Audiobooks Puran Book in Hindi PDF |
| Language | हिंदी / Hindi |
| Duration | 6:05:37 hrs |
| Source | Youtube |
“इतिहास के कई महानतम् व्यक्तियों ने अपने मूल पेशे से हट कर किये गए कृत्यों से प्रसिद्धि पाई जो उन्होंने अपने ऐसे कठिन समय में किये जिसे अधिकतर व्यक्ति यूं ही गवां देते।” ऑरिसन स्वेट मार्डेन
“Many of the greatest men of history earned their fame outside of their regular occupations in odd bits of time which most people squander.” Orison Swett Marden
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