ढोल : एम. वीरप्पा मोईली | Dhol : By M. Veerappa Moily Hindi Book

ढोल : एम. वीरप्पा मोईली | Dhol : By M. Virappa Moyili Hindi Book
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ढोल पुस्तक पीडीएफ के कुछ अंश : एक जनजाति के अन्तः सत्त्व में जो परिवर्तन होते हैं और उनके मूल्यों के बीच जो संघर्ष होते हैं, उनको केवल इतिहास ही नहीं, साहित्य और दर्शन भी अपने-अपने माध्यमों से पहचानते हैं इस अन्तः सत्त्व को केन्द्र बनाकर एम. वीरप्पा मोइली द्वारा कन्नड़ में लिखे गए उपन्यास ‘तेम्बरे’ का हिन्दी अनुवाद है- ‘ढोल’ यह उपन्यास ‘एज ऑफ टाइम’ नाम से अंग्रेजी में भी छप चुका है।
ढोल कन्नड़ साहित्य का एक महत्वपूर्ण उपन्यास है, जो कर्नाटक के तटीय इलाके में रहनेवाले सीमान्त समुदाय ‘पम्बद’ के जीवन की जटिल सांस्कृतिक प्रक्रिया ‘भूताराधना’ की गहरी छानबीन करता है। यह जटिल संस्कृति ‘पम्बद’ की वंशगत वृत्ति के रूप में प्रचलित है।
प्रस्तुत उपन्यास में कथाकार ने इस अद्भुत और पारम्परिक वृत्ति को दो पम्बद भाइयों के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है, जहाँ एक भाई इस परम्परा के खिलाफ विद्रोह करता है तो दूसरा भाई ‘भूताराधना’ की पद्धति को पुनर्स्थापित करने में सच्चे मन से जुट जाता है।

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पुस्तक का विवरण / Book Details
Book Name ढोल | Dhol
Author
CategoryNovel in Hindi PDF Book Spiritual PDF Book in Hindi
Language
Pages 164
Quality Good
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“दूसरों को नियंत्रित करने वाला व्यक्ति शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन जिस व्यक्ति ने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली हो, वह उससे कहीं अधिक महान बलशाली होता है।” ताओ ते चिंग
“He who controls others may be powerful, but he who has mastered himself is mightier still.” Tao Te Ching

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